देवल संवाददाता, मऊ। जिला गंगा समिति,मऊ एवं राजकीय पॉलिटेक्निक,मऊ के संयुक्त तत्वावधान में स्वच्छता ही सेवा विशेष अभियान के अंतर्गत राजकीय पॉलिटेक्निक परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान अभियांत्रिकी डिप्लोमा प्रशिक्षुओं ने उत्साहपूर्वक श्रमदान करते हुए छात्रावास एवं संस्थान परिसर की साफ-सफाई की। विद्यार्थियों ने परिसर में फैले प्लास्टिक रैपर, कचरे तथा झाड़ियों को हटाकर स्वच्छता का संदेश दिया और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने का संकल्प लिया।अभियान के अंतर्गत प्रशिक्षुओं ने सर्वप्रथम अपने छात्रावास की सफाई की। इसके बाद संस्थान के प्रांगण में स्वच्छता गतिविधियां संचालित की गईं। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी,सामूहिक सहभागिता और पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करना रहा। विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि स्वच्छता केवल किसी एक विभाग,संस्था या व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है।इस अवसर पर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए जिला परियोजना अधिकारी,मऊ डॉ. हेमंत यादव ने कहा कि तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थी यदि स्वच्छता को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लें,तो स्वच्छ भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन में स्वच्छता का पालन करने के साथ-साथ अपनी तकनीकी दक्षता का उपयोग समाज में स्वच्छता,स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए करना चाहिए।डॉ. यादव ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे ऐसे सॉफ्टवेयर,डिजिटल सामग्री एवं मोबाइल एप्लिकेशन विकसित करने की दिशा में कार्य करें, जिनके माध्यम से स्वच्छता, स्वास्थ्य,कचरा प्रबंधन तथा पर्यावरण संरक्षण से संबंधित संदेशों को सरल,रोचक और प्रभावी तरीके से आमजन तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि तकनीकी नवाचार के माध्यम से लोगों को जागरूक कर स्वच्छ भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में तेजी लाई जा सकती है।उन्होंने स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए खाद्य पदार्थों में मिलावट की पहचान करने वाले सस्ते एवं किफायती उपकरण विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कई जांच उपकरण महंगे होने के कारण आम नागरिकों की पहुंच से बाहर हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को कम लागत वाले उपकरण विकसित करने की दिशा में प्रयास करना चाहिए, जिनका उपयोग सामान्य नागरिक भी आसानी से कर सकें। इसके अतिरिक्त वायु,जल एवं मृदा प्रदूषण की जांच के लिए किफायती तकनीक विकसित करने तथा उनके उपयोग के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को स्वच्छ परिसर,स्वस्थ समाज और प्रदूषणमुक्त पर्यावरण के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान संतोष कुमार,अनूप कुमार,प्रज्ञा सिंह,वीरेश कुमार,अभिनय सिंह,विनय कुमार तथा डॉ. राजकमल शास्त्री सहित संस्थान के प्रवक्तागण,कर्मचारीगण एवं छात्र-छात्राओं ने सक्रिय रूप से सहभागिता की।स्वच्छता ही सेवा विशेष अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि नियमित साफ-सफाई,कचरे का उचित प्रबंधन,प्लास्टिक के अनावश्यक उपयोग में कमी तथा तकनीकी नवाचार को अपनाकर स्वच्छ एवं स्वस्थ समाज के निर्माण में प्रभावी योगदान दिया जा सकता है।
स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत राजकीय पॉलिटेक्निक, मऊ में प्रशिक्षुओं ने किया श्रमदान
अक्टूबर 29, 2026
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