अफगानिस्तान पर 'मास्को फार्मेट' की क्षेत्रीय बातचीत का आठवां दौर बिना किसी संयुक्त बयान के खत्म हो गया। इस असफलता का मुख्य कारण पाकिस्तान और अफगानिस्तान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच आतंकवाद और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर गहरी असहमति होना था।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विशेष दूत जमीर काबुलोव ने इस बात पर गहरा खेद व्यक्त किया कि सभी प्रतिभागी देश अंतिम दस्तावेज पर आम सहमति नहीं बना सके। बैठक में चीन, भारत, ईरान, रूस और मध्य एशियाई देशों के विशेष दूत शामिल हुए थे। विवाद की मुख्य जड़ दोनों पड़ोसी देशों के बीच आतंकवाद से निपटने के तरीकों पर टकराव था।
इस गतिरोध ने क्षेत्रीय शांति प्रयासों को बड़ा झटका दिया है। हालांकि रूस ने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और मध्यस्थता की पेशकश की है, लेकिन आपसी अविश्वास के चलते यह महत्वपूर्ण कूटनीतिक मंच बिना किसी ठोस परिणाम के ही समाप्त हो गया।
