भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान शुभमन गिल ने तिरुवनंतपुरम में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले जा रहे पहले वनडे मैच में टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी है। इस मैच में गिल ने पंजाब से ही आने वाले नमन धीर को डेब्यू का मौका दिया है। नमन का ये डेब्यू उन लोगों को जवाब है जिन्होंने उनके पिता से कहा था कि, 'फरीदकोट से कोई पंजाब के लिए नहीं खेला इंडिया दूर की बात है।'
आज ग्रीनफील्ड स्टेडियम पर जब नमन नीली जर्सी और कैप पहनकर उतरेंगे तो उनके पिता को ताने देने वालों के मुंह पर गोंद चिपक जाएगी। फरीदकोट के रहने वाले नमन धीर के कारण उनके पिता आज गर्व महसूस कर रहे होंगे।
क्रिकेट छोड़ने का बना लिया था मन
नमन लगातार क्रिकेट खेल रहे थे, लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी। ऐसे में उन्होंने क्रिकेट छोड़ कनाडा जाने का मन बना लिया था, लेकिन उनके पिता ने उनको रोक लिया। नमन ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए पुराने इंटरव्यू में बताया था, "आधे से ज्यादा पंजाब कनाडा जाना चाहता है। मैं भी उनमें से एक था। 2022 की शुरुआत में मैंने क्रिकेट छोड़ने का मन बना लिया था। मेरी बहन कनाडा में एडमंटन में रहती हैं तो मैं वहां जाने पर विचार कर रहा था। मेरे पिता ने कहा था कि अपने आप को एक साल और दो और मैंने दिया। दिसंबर-2022 में मैंने रणजी ट्रॉफी डेब्यू किया। एक साल बाद 2023 में मुझे मुंबई इंडियंस ने खरीदा।"
आईपीएल खेलने के बाद नमन की जिंदगी बदल गई। वह लोगों की नजरों में आ गए। वह लगातार टीम के लिए खेलते रहे और अपनी पहचान बनाते रहे। पंजाब की टी20 लीग में भी नमन ने अपने बल्ले का दम दिखाया।
पिता को मिलते थे ताने
जिन पिता ने नमन को कनाडा जाने से रोका उन्होंने नमन के कारण ताने तक सुने। नमन के पिता ने अखबार को बताया था, "जब मैं उसे स्कूल लेने जाता था और वहां से क्रिकेट प्रैक्टिस के लिए ले जाता था तब प्रिंसिपल मैडम मुझसे कहती थीं कि धीर सर आप बच्चे की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं, फरीदकोट से कोई पंजाब के लिए नहीं खेला इंडिया तो दूर की बात है। ये ताना जब आम बन गया तो मैंने नमन से कहा कि जब तुम टीवी पर छक्के मारते दिखोगे तो ये ताने तालियों में बदल जाएंगे।"
