कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।अंबेडकर नगर जनपद मुख्यालय का दिल धड़कना बंद हो रहा है। पहितीपुर चौराहा, दोस्तपुर चौराहा, मालीपुर रोड और रोडवेज ब्लॉक के सामने सड़कें अब सड़क नहीं रहीं—वे जाम का अड्डा बन चुकी हैं। ऑटो और ई-रिक्शा वालों ने खुलेआम स्टैंड बना रखा है, पटरी के दुकानदार सड़क के किनारे तक कब्जा जमाए बैठे हैं। नतीजा? आम जनता घंटों जाम में फंसी तड़प रही है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे सो रहे हैं।सुबह से शाम तक ये चौराहे और सड़कें नरक समान हो जाती हैं। ऑटो-ई रिक्शा चालक अपनी मर्जी से खड़े होकर यात्री ढूंढते हैं, दुकानदार पटरी से लेकर सड़क के आधे हिस्से तक सामान फैलाए बैठे रहते हैं। पैदल चलने की जगह नहीं, दोपहिया-चारपहिया का गुजरना मुश्किल। एंबुलेंस, स्कूल बस या आम आदमी की गाड़ी—सब एक ही जाम में फंस जाते हैं। जनता भुगत रही है, पर प्रशासन की नींद नहीं टूट रही।यह सिर्फ यातायात की समस्या नहीं, प्रशासनिक विफलता का खुला प्रमाण है। बार-बार शिकायतें की जाती हैं, फिर भी न तो अवैध स्टैंड हटाए जा रहे हैं, न पटरी-सड़क के अतिक्रमण पर कोई कार्रवाई। जिम्मेदार अधिकारी लापरवाही का पर्याय बन चुके हैं। क्या जनपद मुख्यालय को इस तरह जाम और अराजकता का अड्डा बनाकर छोड़ दिया जाएगा?—कब जागेंगे जिम्मेदार? कब हटेगा अतिक्रमण? कब मिलेगी सड़कों पर आम आदमी को राहत? अगर प्रशासन अभी भी आंखें बंद रखेगा तो अंबेडकर नगर का मुख्यालय और बदनाम होगा। अब कार्रवाई की जरूरत है, वादों की नहीं।
