आमिर, देवल ब्यूरो ,जौनपुर, 04 अगस्त। शहर के मुफ़्ती मोहल्ला स्थित मौला अलीघाट से 20 सफ़र (चेहलुम) के अवसर पर मंगलवार को ऐतिहासिक दरिया वाला जुलूस पूरी अकीदत, ग़म और धार्मिक श्रद्धा के साथ निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में मोमिनीन ने शामिल होकर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और शोहदाए कर्बला को अश्कों के साथ ख़िराज-ए-अकीदत पेश किया। पूरे रास्ते "या हुसैन" और "ऐ हुसैन" की सदाओं से वातावरण गूंजता रहा, जबकि मातम और नौहाख़्वानी के बीच जुलूस अपने पारंपरिक मार्ग से शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ।
जुलूस से पहले आयोजित मजलिस का आगाज़ मरहूम नज़र हसन एडवोकेट के हमनवा जनाब सैय्यद मेहदी जैदी की सोज़ख़्वानी से हुआ। इसके बाद हुज्जतुल इस्लाम मौलाना महफ़ूज़ुल हसन ख़ाँ क़िब्ला (प्रिंसिपल नासिरिया अरबी कॉलेज एवं इमाम-ए-जुमा, जौनपुर) ने मजलिस को ख़िताब करते हुए कर्बला की घटना को इंसानियत, सब्र, कुर्बानी और इंसाफ़ का सबसे बड़ा पैग़ाम बताया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन (अ.स.) ने हक़ और इंसाफ़ की हिफ़ाज़त के लिए अपने परिवार और साथियों के साथ जो अज़ीम कुर्बानी दी, वह पूरी मानवता के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत रहेगी।
कार्यक्रम की नक़ाबत मौलाना ज़ीशान आज़मी (शान) ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इमाम हुसैन (अ.स.) का ग़म किसी एक फिरके तक सीमित नहीं, बल्कि हर उस इंसान का ग़म है जो इंसाफ़, अमन और सत्य में विश्वास रखता है। उन्होंने कहा कि कर्बला का पैग़ाम मज़हबी सीमाओं से ऊपर उठकर इंसानियत, भाईचारे, सब्र और ज़ुल्म के ख़िलाफ़ डटकर खड़े होने की सीख देता है।
मौलाना ज़ीशान आज़मी ने चेहलुम (अरबईन) के अवसर पर इराक़ के पवित्र शहर कर्बला में उमड़ने वाले लाखों ज़ायरीन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नजफ़ से कर्बला तक लगने वाले हुसैनी मोकेब (सबीलों) में ज़ायरीन की निस्वार्थ सेवा पूरी दुनिया के सामने इंसानियत और मेहमाननवाज़ी की मिसाल पेश करती है। भारत से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अरबईन में शामिल होकर अमन, भाईचारे और गंगा-जमुनी तहज़ीब का संदेश देते हैं।
इसके बाद मौलाना हसन अकबर ख़ाँ रन्नवी ने तक़रीर पेश की। पेशख़्वानी की ख़िदमत मौलाना बाक़र मेहदी, जनाब असलम नक़वी, एजाज़ जौनपुरी तथा ज़ैन मिर्ज़ापुरी ने अंजाम दी। वहीं मशहूर नौहाख़्वां जनाब अली मूसा ने दर्दभरे नौहे पेश कर मौजूद लोगों को ग़म-ए-हुसैन में डुबो दिया।
मजलिस के उपरांत ऐतिहासिक दरिया वाला जुलूस मौला अलीघाट, मुफ़्ती मोहल्ला से अपने पारंपरिक मार्ग पर रवाना हुआ। जुलूस में महिलाओं, पुरुषों, बुज़ुर्गों और बच्चों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। जगह-जगह अकीदतमंदों ने जुलूस का इस्तकबाल किया और सबीलों के माध्यम से पानी व शर्बत की व्यवस्था कर आने वाले लोगों की सेवा की।
पूरे आयोजन के दौरान पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए थे। प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल की निगरानी में जुलूस पूरी तरह शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम के समापन पर अंजुमन सज्जादिया (रज़ि.), अली कमेटी, हुसैन कमेटी, अब्बास कमेटी एवं अहले मोहल्ला की ओर से जुलूस में शामिल सभी मोमिनीन, उलमा-ए-किराम, ज़ाकिरीन, नौहाख़्वानों, मातमी अंजुमनों, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन तथा कार्यक्रम का कवरेज करने वाले पत्रकारों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। अंजुमन सज्जादिया (रज़ि.) के सदर हुसैन रज़ा (मीसम), जनरल सेक्रेटरी हसन ज़ाहिद ख़ान (बाबू), नायब सदर हाजी मोहम्मद मेहदी, ज्वाइंट सेक्रेटरी डॉ. ज़फ़र आब्दी, ख़ज़ानची रौनक़ अब्बास तथा मीडिया प्रभारी आबिश इमाम (सनी) ने सभी के सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि आपसी भाईचारे और सहयोग से ही इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन का सफल संचालन संभव हो सका।
