आमिर, देवल ब्यूरो ,जौनपुर। लंबित मांगों के समाधान की मांग को लेकर गुरुवार को अखिल भारतीय आशा कर्मचारी महासंघ के बैनर तले जिले की आशा कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी धरना-प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में पहुंचीं आशा कर्मियों ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जताते हुए अपनी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। बाद में न्यायिक मजिस्ट्रेट शैलेंद्र सिंह को ज्ञापन सौंपकर केंद्र एवं प्रदेश सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।
धरने को संबोधित करते हुए महासंघ की जिलाध्यक्ष निर्मला शर्मा ने कहा कि आशा कर्मचारी लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बनकर कार्य कर रही हैं, लेकिन उन्हें उनके कार्य के अनुरूप न तो मानदेय मिल रहा है और न ही सामाजिक सुरक्षा की सुविधाएं। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी 7 अक्टूबर को राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत जिलाधिकारी के माध्यम से सरकार को मांगपत्र भेजा गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष है।
धरने के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने पद के अनुरूप 26 हजार से 48 हजार रुपये प्रतिमाह न्यूनतम वेतन, वरिष्ठ कर्मचारियों के लिए पदोन्नति की व्यवस्था, वार्षिक वेतन वृद्धि तथा समान कार्य के लिए समान वेतन लागू करने की मांग प्रमुखता से उठाई। इसके साथ ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों का संविलियन करने और आशा योजना में ठेका प्रथा एवं निजी एनजीओ की व्यवस्था समाप्त करने की भी मांग की गई।
प्रदर्शनकारियों ने नियमित टीए-डीए, सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता, ईपीएफ, ईएसआई और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग रखी। साथ ही टीकाकरण कार्य के लिए पिछले दो दशकों से मिलने वाली 75 रुपये प्रतिदिन की प्रोत्साहन राशि को बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रतिदिन करने तथा दुर्घटना या सामान्य मृत्यु की स्थिति में 5 लाख रुपये मुआवजा देने की भी मांग की।
धरने के अंत में आशा कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी 17 सूत्रीय मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक एवं तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
