भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने गुरुवार को राहुल गांधी की भारत के लिए "आर्थिक सुनामी" की चेतावनी का कड़ा जवाब दिया और इसे डर फैलाने की पुरानी चाल कहकर खारिज कर दिया।
लोकसभा में विपक्ष के नेता ने मध्य पूर्व में बिगड़ती स्थिति और भारत पर इसके संभावित असर को लेकर चिंता जताई थी। इसका तीखा जवाब देते हुए बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल के दावों को खारिज कर दिया और तर्क दिया कि भारत ईरान युद्ध से होने वाले किसी भी आर्थिक नुकसान का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
'भारत बेसहारा नहीं'
कई आर्थिक और रणनीतिक संकेतकों का हवाला देते हुए मालवीय ने जोर देकर कहा कि मिडिल-ईस्ट में चल रहे संकट के बीच "भारत बेसहारा नहीं है।" एक्स पर एक पोस्ट में मालवीय ने राहुल के दावों का मुकाबला करने के लिए कई आर्थिक संकेतकों का हवाला दिया।
उन्होंने कहा कि मई 2026 में ई-वे बिल जेनरेशन में 12.9% की बढ़ोतरी हुई, जबकि मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की गतिविधियां मजबूत बनी रहीं, जिनका PMI स्कोर क्रमशः 56.6 और 58.9 रहा।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि अप्रैल में खुदरा महंगाई दर 3.48% रही, जो भारतीय रिजर्व बैंक के लक्ष्य से कम थी, जबकि वित्त वर्ष 26 में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का प्रवाह रिकॉर्ड 94.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
भारत के बाहरी क्षेत्र की मजबूती की ओर इशारा करते हुए मालवीय ने कहा कि पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार और मजबूत सर्विस एक्सपोर्ट ने वैश्विक अस्थिरता के बीच स्थिरता बनाए रखने में मदद की है।
'ये लचीलेपन के संकेत हैं'
मालवीय ने कहा, "ये ऐसी अर्थव्यवस्था के संकेत नहीं हैं जिसमें झटकों को सहने की क्षमता न हो। ये लचीलेपन के संकेत हैं। सरकार ने नागरिकों, व्यवसायों और नौकरियों की सुरक्षा के लिए सीधे कदम भी उठाए हैं।" बीजेपी नेता ने उपभोक्ताओं और व्यवसायों को वैश्विक आर्थिक झटकों से बचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा, "जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं तो पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती ने उपभोक्ताओं को राहत दी। घरेलू उपलब्धता को सुरक्षित रखने और महंगाई को काबू में रखने के लिए जरूरत पड़ने पर सप्लाई-साइड हस्तक्षेप और निर्यात पर प्रतिबंध जैसे कदम उठाए गए। ECLGS 5.0 के जरिए MSME को 100% गारंटी कवरेज मिलता है, जबकि गैर-MSME और एयरलाइंस को 90% कवरेज मिलता है। पात्र उधारकर्ताओं के लिए पीक वर्किंग कैपिटल के 20% तक की अतिरिक्त क्रेडिट सहायता उपलब्ध है, जिसकी ऊपरी सीमा 100 करोड़ रुपये है।"
उन्होंने आगे कहा, "ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सामना कर रही एयरलाइंस को हर उधार लेने वाले को 1,500 करोड़ रुपये तक की मदद मिल सकती है। इसका मकसद साफ है: रोजगार बचाना, सप्लाई चेन को बनाए रखना और बिना किसी रुकावट के उत्पादन सुनिश्चित करना।"
मालवीय ने आगे कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने सतह पर मौजूद कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण प्रोजेक्ट्स के लिए 37,500 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसका मकसद 75 मिलियन टन गैसीकरण क्षमता बनाना और 2.5-3 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करना है।
उन्होंने कहा, "ये ऐसे काम नहीं हैं जो किसी सरकार के 'शॉक एब्जॉर्बर' (झटके सहने की क्षमता) को खत्म कर रहे हों। ये ऐसे काम हैं जो सरकार के 'शॉक एब्जॉर्बर' को मजबूती से बढ़ा रहे हैं।"
यूपीए सरकार पर हमला
पिछली यूपीए सरकार पर हमला बोलते हुए मालवीय ने 2009 से 2014 तक के आर्थिक आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान रुपये की कीमत में 36% की गिरावट आई, जबकि विदेशी मुद्रा भंडार जुलाई 2011 में लगभग 294 अरब डॉलर से घटकर अगस्त 2013 में लगभग 256 अरब डॉलर रह गया।
उन्होंने कहा, "विदेशी मुद्रा भंडार जुलाई 2011 में लगभग 294 अरब डॉलर से घटकर अगस्त 2013 में लगभग 256 अरब डॉलर रह गया। सितंबर 2013 तक आयात कवर (import cover) घटकर छह महीने से थोड़ा ही ज्यादा रह गया, जो मार्च 2004 में 17 महीने था।"
उन्होंने आगे कहा, "विदेशी मुद्रा भंडार और बाहरी कर्ज का अनुपात वित्त वर्ष 2011 में 95.8% से बिगड़कर वित्त वर्ष 2014 में 68.8% हो गया। RBI को FCNR(B) विंडो खोलनी पड़ी और डॉलर जमा आकर्षित करने के लिए आकर्षक प्रोत्साहन देने पड़े। भारत ने इस योजना के जरिए कुल 26.6 अरब डॉलर जुटाए, जो 1991 के IMF बेलआउट (आर्थिक मदद) से लगभग बारह गुना ज्यादा था।"
मालवीय ने राहुल से घबराहट फैलाना बंद करने की अपील की और दावा किया कि भारत के आर्थिक सुरक्षा उपाय यूजीए के जमाने में ही कमजोर पड़ गए थे किसी भी बाहरी झटके के आने से बहुत पहले।
राहुल गांधी ने क्या कहा था?
उनकी यह टिप्पणी राहुल की उस चेतावनी के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के बीच बीजेपी सरकार द्वारा देश के आर्थिक "शॉक एब्जॉर्बर" (आर्थिक झटकों से बचाने वाले तंत्र) को कथित तौर पर खत्म किए जाने के कारण भारत एक "आर्थिक सुनामी" की ओर बढ़ रहा है।
राहुल ने कहा था, "एक आर्थिक सुनामी आ रही है। इसकी वजह यह है कि बीजेपी सरकार ने भारत की उस सुरक्षा प्रणाली को हटा दिया है, जो अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से आने वाले झटकों को रोकने का काम करती थी। एक खतरनाक आर्थिक सुनामी आ रही है, कीमतें बढ़ रही हैं और यह तो अभी बस शुरुआत है।"
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