देवल संवाददाता, गाजीपुर। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज,अयोध्या के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्र आंकुशपुर गाजीपुर एवं केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, वाराणसी के द्वारा ग्राम चकसलेम, मोहम्मदाबाद ग़ाज़ीपुर के किसानों को जागरूक करने हेतु खेत बचाओ अभियान के तहत एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया। जिसमे उर्वरकों का संतुलित प्रयोग एवं गाँव में मिट्टी की सेहत सुधारने पर चर्चा किया गया 1 कार्यक्रम में के˛ वि˛ के˛ वैज्ञानिक डॉ दीपक प्रजापति‚ डॉ शशांक सिंह एवं सी˛ आई˛ पी˛ एम˛ सी˛ वाराणसी से डॉ सुनीत कुमार कटियार सहायक निदेशक ,श्री अवधेश कुमार वनस्पति सरंक्षण अधिकारी एवं क्षेत्र के प्रगतिशील कृषक और कृषक महिलाओं ने प्रतिभाग किया 1 इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग को रोकना, मिट्टी की गिरती उर्वरा शक्ति को बचाना और किसानों को जागरूक करना है। संतुलित खाद का संदेश: शिविर में वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश के संतुलित उपयोग की जानकारी दी। हरी खाद और जैविक खेती पर जोर देते हुए मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए किसानों को ढैंचा, सनई जैसी हरी खाद और बायो-फर्टिलाइजर्स (जैव उर्वरक) अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। सी आई पी एम सी वाराणसी के सहायक निदेशक ने किसानों अवगत कराया कि खेत बचाओ अभियान पर हमारा जनादेश रासायनिक पेस्टिसाइड्स का इस्तेमाल कम से कम करें 1 जैव पेस्टिसाइड, बायोकंट्रोल एजेंट के उपयोग पर विशेष ध्यान दें 1 भिंडी एवं बैगन के खेत में कीट प्रबंधन के तहत फेरोमोन ट्रैप लगाकर प्रदर्शन कराया 1 वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया की खेत बचे, लागत संभले, मिट्टी सुधरे और किसान बने आत्मनिर्भर के मूल मंत्र के साथ इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने की तैयारी है 1 सरकार का खेत बचाओ अभियान’ मिट्टी की सेहत सुधारने, खेती की लागत घटाने और रासायनिक खादों के संतुलित उपयोग का मुख्य संदेश दिया 1 कम खाद, सही खाद और सही सलाह लागत में कमी: किसानों को मिट्टी परीक्षण के आधार पर सही और संतुलित मात्रा में उर्वरक डालने की सलाह दिया गया । जिससे खेती का खर्च कम हो। वैज्ञानिक और प्राकृतिक खेती: किसानों को पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण, और हरी खाद अपनाने के लिए प्रेरित गया। खरीफ की मुख्य फसलें जैसे धान, मक्का, सोयाबीन, बाजरा और कपास से बंपर पैदावार लेने के लिए 17 पोषक तत्व का 4 R के सिद्धांत जैसे सही स्रोत, सही समय, सही मात्रा और सही स्थान पर ऊर्वरकों का प्रयोग एवं पोषक तत्व प्रबंधन की संपूर्ण जानकारी दी गई 1 इससे खेत में जरूरत से ज्यादा खाद डालने का खर्च बचेगा और मिट्टी की सेहत भी खराब नहीं होगी। फसलों में मुख्य रूप से नाइट्रोजन (N), फास्फोरस (P) और पोटाश (K) की सही अनुपात में प्रयोग करने की आवश्यकता है।धान और मक्का जैसे फसलों को मुख्य रूप से 120:60:40 या 100:50:40 ( किग्रा प्रति हेक्टेयर ) के अनुपात में NPK की आवश्यकता होती है। तिलहन और दलहन (सोयाबीन, मूंग, अरहर) इन फसलों में नाइट्रोजन की कम और फॉस्फोरस तथा सल्फर की ज्यादा जरूरत होती है। इनके लिए 20:60:40 (किग्रा प्रति हेक्टेयर) के अनुपात में NPK की अनुपात बेहतर माना जाता है।आजकल भारतीय मिट्टी में जिंक (Zn) और सल्फर (S) की भारी कमी देखी जा रही है। जिंक सल्फेट धान और मक्के की फसल में 25 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से जिंक सल्फेट डालें। यदि खड़ी फसल में पत्तियां पीली पड़ रही हैं, तो 0.5% जिंक सल्फेट का छिड़काव करें।
कृषि विज्ञान केंद्र आंकुशपुर गाजीपुर- खेत बचाओ अभियान के तहत जागरुकता शिविर का हुआ आयोजन
जून 04, 2026
0
Tags
