देवल संवाददाता आजमगढ़। महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय, आज़मगढ़ के मुख्य परिसर में आज 'विश्व पर्यावरण दिवस' के सुअवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के तत्वावधान में एक वृहद पर्यावरण जागरूकता एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष अभियान के अंतर्गत विश्वविद्यालय परिसर को हरा-भरा बनाने और समाज को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के उद्देश्य से व्यापक स्तर पर औषधीय, छायादार और फलदार पौधों का रोपण किया गया।
इस वृक्षारोपण कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति ,परीक्षा नियंत्रक,राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम समन्वयक (प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर) डॉ० देवेंद्र कुमार पाण्डेय तथा विश्वविद्यालय परिसर की तीनों इकाईयों के कार्यक्रम अधिकारियों डॉ.शशि प्रकाश शुक्ला, डॉ.हरेन्द्र सिंह प्रजापति एवं डॉ.मनीषा सिंह सहित भारी संख्या में स्वयंसेवकों, प्राध्यापकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने इस पुनीत कार्य में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।
माननीय कुलपति द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए अमरूद , शहतूत, जामुन बरगद आदि के पौधे छात्रावास एवं शैक्षणिक भवनों के सामने रोपित किया गया तथा मंदिर परिसर में चंदन वाटिका की स्थापना की गयी। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए माननीय कुलपति ने कहा कि 'पर्यावरण का संतुलन हमारे जीवन का आधार है'। आज वैश्विक स्तर पर जिस तरह से तापमान में वृद्धि (ग्लोबल वार्मिंग) और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां सामने आ रही हैं,उनसे निपटने का एकमात्र प्रभावी उपाय अधिक से अधिक वृक्षारोपण और प्रकृति का सम्मान करना है।
उन्होंने राष्ट्रीय सेवा योजना के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा:
> "विश्वविद्यालय केवल किताबी ज्ञान का केंद्र नहीं है, बल्कि सामाजिक और वैश्विक समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता जगाने की कार्यशाला भी है। प्रत्येक छात्र और शिक्षक का यह नैतिक दायित्व है कि वे कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और न केवल लगाएं, बल्कि उसके वृक्ष बनने तक उसकी पूरी देखभाल भी करें।"
परीक्षा नियंत्रक एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने दी पर्यावरण संरक्षण की सीख
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक महोदय ने भी परिसर में 'पीपल' और 'आंवला' के पौधों का रोपण किया। छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अकादमिक उत्कृष्टता के साथ-साथ स्वस्थ पर्यावरण भी हमारी बौद्धिक क्षमता को बढ़ाने में सहायक होता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी जीवनशैली को प्रकृति के अनुकूल (इको-फ्रेंडली) बनाने का आह्वान किया और प्लास्टिक के उपयोग को पूरी तरह से वर्जित करने पर बल दिया।
राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम समन्वयक ने इस अवसर पर एनएसएस के मूल ध्येय वाक्य **"मैं नहीं, आप" (Not Me, But You)** को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए कहा कि निस्वार्थ भाव से की गई प्रकृति की सेवा ही मानव जाति का कल्याण कर सकती है। उन्होंने पूरे वर्ष आयोजित की जाने वाली पर्यावरण संबंधी गतिविधियों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की।
कार्यक्रम अधिकारियों के दिशा-निर्देशन में स्वयंसेवकों ने गड्ढे तैयार करने से लेकर, जैविक खाद डालने और पौधों को सुरक्षित करने के लिए ट्री-गार्ड लगाने तक की पूरी प्रक्रिया को बेहद उत्साह के साथ पूरा किया। इस दौरान औषधीय पौधे जैसे नीम, तुलसी, गिलोय के साथ-साथ छायादार वृक्ष जैसे बरगद, पाकड़, गुलमोहर और फलदार पौधे जैसे जामुन और आम के पौधे रोपे गए।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ प्राध्यापक, कुलसचिव कार्यालय के अधिकारीगण एवं भारी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर कार्यक्रम समन्वयक ने माननीय कुलपति , परीक्षा नियंत्रक, सभी कार्यक्रम अधिकारियों, मीडिया बंधुओं और प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी कर्मियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस सफल आयोजन ने न केवल विश्वविद्यालय परिसर के सौंदर्य और हरियाली को बढ़ाने का काम किया है, बल्कि युवा पीढ़ी में प्रकृति के प्रति उनके कर्तव्यों का बीजारोपण भी किया है।