भारतीय सेना ने 105mm इंडियन फील्ड गन को, जो रेजिमेंट ऑफ आर्टिकल की मुख्य ताकत है, एक ज्यादा घातक हथियार बनाने की दिशा में एक कदम उठाया है। यह कदम सशस्त्र बलों द्वारा चलाए जा रहे बड़े आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है।
सेना ने एक इंडियन फील्ड गन को इस तरह से बदला है कि वह अपने आप निशाना लगा सके, इसका मतलब है कि तोप को लक्ष्य पर सेट करने के लिए डायल को हाथ से घुमाने का काम, जिसे तोपची की भाषा में लेइंग कहा जाता है। अब कंप्यूटर के जरिअ किया जाएगा। इससे तोपखाना दस्ते को फायरिंग के समाधान अपने आप निकालने और ठीक निशाने को ठीक करने में मदद मिलेगी।
सेना की FH-77B तोप, जिसे आम तौप पर बोफोर्स तोप के नाम से जाना जाता है, के साथ-साथ K-9 वज्र और M-777 जैसे नए सिस्टम भी कंम्यूटर की मदद से ही लक्ष्य पर सेट किए जाते हैं।
ऑटोमैटिक गन-लेइंग तकनीक का इस्तेमाल
सेना के एक सूत्र ने बताया, "ऑटोमैटिक गन-लेइंग तकनीक के जरिए तोप को सेट करने से उसकी मारक क्षमता में सुधार होगा। इस नए बदलाव से फायरिंग यूनिट का रिस्पॉन्स टाइम बेहतर होगा और तोपें ज्यादा सटीक हो जाएंगी। तेजी से निशान साधने से फायरिंग की दर बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। तोपखाने की मदद चाहने वाले सैनिकों द्वारा इन बदलावों की बहुत सराहना की जाएगी।"
तोप को दोबारा सेट करने में लगेगा कम समय
ऑटो-लेइंग सिस्टम, डिजिटल फायर-कंट्रोल सिस्टम में लगे मोटराइज्ड ड्राइव से हाथ से घुमाए जाने वाले क्रैंक को बदलकर, लक्ष्य को पहचानने और तोप को दोबारा सेट करने में लगने वाले समय के कम कर देता है।
यह ऊंचे पहाड़ों पर होने वाली लड़ाई में सटीकता को बढ़ाता है और तेजी से शूट एंड स्कूट ऑपरेशन करके सैनिकों के बचने की संभावना को बेहतर बनाता है, जिससे दस्ते तेजी से गोली चलाकर अपनी जगह बदल सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस तोप में बदलाव सेना की 506 आर्मी बेस वर्कशॉप में ही किए गए हैं।
