आमिर, देवल ब्यूरो ,जौनपुर में चर्चित “आजाद बिंद हत्याकांड” से जुड़े आरोपियों के साथ हुई पुलिस मुठभेड़ के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मुठभेड़ में घायल अभियुक्तों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन वहां पहुंचे पत्रकारों को कवरेज करने से रोक दिया गया, जिससे मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों और मौजूद पत्रकारों के अनुसार, जब वे अस्पताल परिसर में घटना की जानकारी और तस्वीरें लेने पहुंचे, तो वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। आरोप है कि कुछ पुलिसकर्मियों ने न केवल कवरेज पर रोक लगाई, बल्कि पत्रकारों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए अपमानजनक व्यवहार भी किया। इस घटना के बाद मीडिया कर्मियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
विवाद उस समय और बढ़ गया, जब यह जानकारी सामने आई कि जिला पुलिस के आधिकारिक मीडिया ग्रुप में खुद पुलिस द्वारा घायल आरोपियों की तस्वीरें साझा की गईं। पत्रकारों का सवाल है कि जब मौके पर स्वतंत्र कवरेज से रोका गया, तो फिर पुलिस द्वारा चुनिंदा तस्वीरें जारी करना पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
पत्रकार संगठनों ने पूरे घटनाक्रम की कड़ी निंदा करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार हैं और इससे लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचता है। संगठनों ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग उठाई है।
फिलहाल, इस पूरे मामले में पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, मीडिया जगत इस प्रकरण को लेकर आगे की रणनीति बनाने में जुटा हुआ है और जल्द ही इस मुद्दे पर बड़ा कदम उठाया जा सकता है।
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