कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।माननीय उच्च न्यायालय के हालिया निर्णय को लेकर किन्नर समाज में गहरा असंतोष व्यक्त किया जा रहा है। किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर स्वामी डॉ.वैष्णवी जगदंबा नंदगिरी ने कहा कि समाज की ओर से प्रभावी पैरवी नहीं हो पाई, जिसके कारण उनका पक्ष न्यायालय के समक्ष सही ढंग से प्रस्तुत नहीं हो सका। किन्नर समुदाय का कहना है कि वे वसूली नहीं करते, बल्कि पारंपरिक रूप से खुशी के अवसरों पर नेग प्राप्त करते हैं, जो सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। हालांकि यह भी स्वीकार किया गया कि हर समाज की तरह उनके समुदाय में भी कुछ असामाजिक तत्व हो सकते हैं, लेकिन उनके आधार पर पूरे समाज को गलत ठहराना उचित नहीं है। किन्नर समाज का अस्तित्व प्राचीन काल से रहा है और धार्मिक ग्रंथों में भी उनका उल्लेख सम्मानपूर्वक मिलता है। समाज का कहना है कि उनकी परंपराएं आस्था और सामाजिक मान्यताओं से जुड़ी हैं। वर्तमान निर्णय उनके अस्तित्व और परंपराओं को गलत रूप में प्रस्तुत करता है, इसलिए वे इसे उच्च अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। साथ ही आम जनता से अपील की गई है कि वे किन्नर समाज के प्रति सम्मान और सहयोग का भाव बनाए रखें, क्योंकि यह समुदाय आज भी सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा है।
