देवल संवाददाता, मऊ। भारत की आजादी केवल एक आंदोलन नहीं थी,बल्कि लाखों वीरों के त्याग,संघर्ष और बलिदान की अमर गाथा थी। उन्हीं महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में एक नाम था पंडित आचार्य गोरखनाथ शुक्ला,जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।15 अगस्त 1942 के ऐतिहासिक मधुबन कांड में वे सबसे पहले गिरफ्तार किए गए स्वतंत्रता सेनानी थे। जब उन्हें छुड़ाने के लिए हजारों देशभक्त थाने पहुंचे तो अंग्रेजी हुकूमत घबरा गई और निहत्थी भीड़ पर गोलियां चला दी गईं। इस दर्दनाक घटना की गूंज ब्रिटिश पार्लियामेंट तक पहुंची और वहां भी इस कांड पर चर्चा हुई। मधुबन कांड आज भी देशभक्ति,साहस और बलिदान की ऐसी कहानी है जो हर भारतीय को भीतर तक झकझोर देती है।ऐसे महान तपस्वी और वीर सेनानी की स्मृतियों को नमन करने उनके आवास पहुंचे अधिवक्ता मोहम्मद अंसारी। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी के पुत्र ज्ञान पाचसपति शुक्ला को सम्मानित किया और कहा कि जिन वीरों ने अपने खून और संघर्ष से देश को आज़ादी दिलाई,उनके त्याग को कभी भुलाया नहीं जा सकता।मोहम्मद अंसारी ने भावुक होकर कहा कि आज की पीढ़ी को ऐसे महान सेनानियों के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। देश की आज़ादी हमें यूं ही नहीं मिली,इसके पीछे अनगिनत परिवारों के आंसू,संघर्ष और बलिदान छिपे हुए हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत और उनके सम्मान को हमेशा जीवित रखा जाए,क्योंकि यही हमारी असली पहचान और राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है।मोहम्मद अंसारी अधिवक्ता ने मांग की ऐसे परिवारों को पेंशन दी जाए तथा उनकी तीसरी पीढ़ी के लिए सरकारी नौकरियों और शिक्षा में विशेष कोटा बढ़ाया जाए,ऐसे परिवारों का सम्मान करके देश में राष्ट्रवाद और देश प्रेम की भावना को बल मिलेगा।साथ में रहे स्वतंत्रता संग्राम परिवार से सुशील पांडे,अधिवक्ता राज कपूर,इजहार अहमद तथा राहुल शुक्ला दिगर लोग मौजूद रहे।
