देवल, ब्यूरो चीफ,डाला, सोनभद्र। विकास खंड कोन के ग्राम पंचायत बरवाडीह में सरकारी धन के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब न्यायालय की चौखट तक
पहुंच गया है। ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव पर अपने परिजनों के नाम सरकारी धन निकालकर गबन करने के गंभीर आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ता ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की अपील की है।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि आरजीआरएस पोर्टल पर दर्ज शिकायत की जांच में स्वयं सहायक विकास अधिकारी (कोन) ने वित्तीय अनियमितता और सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि की है। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट माना गया कि पंचायत में नियमों की अनदेखी करते हुए सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विभागीय जांच में अनियमितता सिद्ध हो चुकी है, तो अब तक दोषी ग्राम प्रधान और सचिव के खिलाफ कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इस मामले में न तो एफआईआर दर्ज की गई. न निलंबन की कार्रवाई हुई और न ही गबन की गई धनराशि की वसूली की दिशा में कोई कदम उठाया गया, जो चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा खेल ब्लाक स्तर के उच्चाधिकारियों की सुनियोजित मिलीभगत का हिस्सा है, जिसमें सरकारी धन को अपने करीबियों के नाम निकालकर बंदरबांट किया गया। इसके बावजूद प्रशासनिक चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों में चर्चा है कि कहीं दोषियों को राजनीतिक या विभागीय संरक्षण तो प्राप्त नहीं। शिकायतकर्ता अर्जुन सिंह ने न्यायालय से मांग की है कि मामले में निष्पक्ष सुनवाई कराते हुए ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, तत्काल निलंबन और गबन की राशि की वसूली के आदेश दिए जाएं, ताकि पंचायत स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके। बरवाडीह का यह मामला पंचायत व्यवस्था की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। अब सबकी निगाहें न्यायालय और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
.jpeg)