देवल, ब्यूरो चीफ,सोनभद्र। जनपद का परिवहन विभाग अब सीधे तौर पर सवालों के घेरे में है। आरोप इतने गंभीर हैं कि पूरा सिस्टम ही कटघरे में खड़ा नजर आ रहा है। ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर वाहन रजिस्ट्रेशन, फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाने के नाम पर रेट तय होने की चर्चाएं आम हो गई हैं। हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि बिना घूस दिए न फाइल आगे बढ़ती है, और न काम पूरा होता है।
सोमवार को भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष धर्मवीर तिवारी ने औचक एआरटीओ कार्यालय पहुंच कर निरीक्षण किया। इस दौरान मीडिया से बात-चीत के दौरान उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी कार्यालय से चंद दूरी पर हाइवे किनारे स्थित उप संभागीय परिवहन कार्यालय में खुलेआम लूट मची है। यहां बिना पैसे के कोई काम नहीं होता, सब कुछ सेटिंग से चल रहा है। श्री तिवारी ने आरोप लगाया कि सरकार की पारदर्शिता वाली व्यवस्था को जमीनी स्तर पर ध्वस्त किया जा रहा है। ड्राइविंग टेस्ट अनिवार्य होने के बावजूद पीपीपी मॉडल पर चल रहे एटीएस सेंटर और मोटर ट्रेनिंग स्कूल के संचालक खुलेआम अवैध वसूली कर रहे हैं। आरोप है कि लाइसेंस बनवाने के नाम पर मोटी रकम ली जा रही है और शिकायत करने पर कोई सुनवाई नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि दूर-दराज से एआरटीओ कार्यालय आने वाले लोगों को जानबूझकर परेशान किया जाता है, ताकि वे थक-हारकर रिश्वत देने को मजबूर हो जाएं। इतना ही नहीं, ड्राइविंग टेस्ट पास करने के बाद भी सर्टिफिकेट और अप्रूवल के नाम पर अलग से पैसा मांगा जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि करीब 500 रजिस्ट्रेशन आवेदन महीनों से लंबित पड़े हैं। वहीं फिटनेस सेंटर में भी 'मनमानी का खेल' जारी है। बाहर से लाए गए रिफ्लेक्टर को खारिज कर महंगे दाम पर खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। श्री तिवारी ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि यह सब कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेताया कि अगर जल्द ही इस 'वसूली तंत्र' पर लगाम नहीं लगी तो जनता का भरोसा सरकारी व्यवस्था से पूरी तरह उठ जाएगा, जिसका खामियाजा सरकार की साख को भुगतना पड़ेगा। इस दौरान सत्येंद्र आर्य, लालू प्रजापति, आनंद मिश्रा, योगेश सिंह, आशु विश्वकर्मा समेत कई लोग मौजूद रहे।
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