अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने गुरुवार को भारत को बेहतरीन साझीदार बताया और कहा कि भारत जितना ईंधन खरीदना चाहता है, अमेरिका बेचने को तैयार है। अपनी पहली भारत यात्रा के बारे में उन्होंने कहा कि यह यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उन्हें क्वाड देशों के मंत्रियों से मिलने का मौका मिलेगा।
रूबियो 23-26 मई तक भारत में रहेंगे और कोलकाता, आगरा, जयपुर व नई दिल्ली का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा, "वे (भारत) हमारे बेहतरीन सहयोगी और साझीदार हैं। हम उनके साथ मिलकर बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। इसलिए यह महत्वपूर्ण यात्रा है।
क्वाड देशों के प्रतिनिधियों से भी मिलेंगे रूबियो
मुझे लगता है कि हमारे पास बातचीत करने के लिए बहुत सारे मुद्दे होंगे। हम वहां क्वाड देशों के प्रतिनिधियों से भी मिलेंगे, जो बहुत महत्वपूर्ण है। इस वर्ष के आखिर में भी हम एक और क्वाड बैठक करेंगे।"
रूबियो ने बताया कि वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज भी अगले हफ्ते भारत आने वाली हैं और इस दौरान नई दिल्ली के साथ मिलकर काम करने के कई अवसर उपलब्ध होंगे।
वेनेजुएला के तेल पर नजर और भारत का रुख
रुबियो की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी रिफाइनरियों में वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल (हेवी क्रूड ऑयल) की आवक में भारी वृद्धि देखी गई है। फरवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका को वेनेजुएला से 80 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल मिला है।
रुबियो ने यह भी घोषणा की कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज तेल बेचने पर चर्चा करने के लिए अगले सप्ताह भारत की यात्रा करेंगी। उन्होंने कहा, "हमें यह भी लगता है कि वेनेजुएला के तेल को लेकर भी कई अवसर हैं। मेरी जानकारी के मुताबिक, वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति भी अगले हफ्ते भारत की यात्रा पर होंगी।"
होर्मुज पर ईरान को चेतावनी
ईरान के मुद्दे पर रुबियो ने स्पष्ट किया कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण करने या उसकी पहुंच के जरिए पैसे कमाने की तेहरान की किसी भी कोशिश को वाशिंगटन बर्दाश्त नहीं करेगा।
यह चेतावनी उन रिपोर्ट्स के बीच आई है जिनमें कहा गया है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए ओमान के साथ एक स्थायी टोल व्यवस्था पर चर्चा कर रहा है। रुबियो ने इस कदम को वैश्विक व्यापार और नौपरिवहन की स्वतंत्रता के लिए सीधा खतरा करार दिया।
तेल की बढ़ती कीमतें
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग आधा हिस्सा और अपना अधिकांश तेल आयात करता है। ईरान में चल रहे मौजूदा संघर्ष ने एक बड़े ऊर्जा संकट को जन्म दिया है, जिसका असर अब दुनिया भर में महसूस किया जा रहा है। इसके कारण डीजल, पेट्रोल और एलएनजी की कीमतों में भारी उछाल आया है।
इसके जवाब में, भारत ने अपनी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर वित्तीय दबाव को कम करने के उद्देश्य से चार दिनों के भीतर दो बार ईंधन की कीमतों में वृद्धि की, पहले 3 रुपये और फिर 90 पैसे की बढ़ोतरी की गई।
