प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'दृष्टि' मिशन की सफलता पर बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप गैलेक्जआई की टीम को बधाई देते हुए इसे भारत की अंतरिक्ष यात्रा में बड़ा मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि यह दुनिया का पहला OptoSAR सैटेलाइट है और यह देश के युवाओं की नवाचार क्षमता का उदाहरण है।
रविवार को 'दृष्टि' नाम का यह सैटेलाइट अमेरिका के कैलिफोर्निया से स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया। इसे गैलेक्जआई ने विकसित किया है और यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा निजी तौर पर बनाया गया पृथ्वी अवलोकन सैटेलाइट है।
गैलेक्जआई के सीईओ सुयश सिंह ने बताया कि 'दृष्टि' का मतलब है हर परिस्थिति में देख पाना। यह सैटेलाइट मल्टीस्पेक्ट्रल कैमरा और सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) को एक साथ इस्तेमाल करता है, जो दुनिया में पहली बार किया गया है।
'दृष्टि' सैटेलाइट की खासियत
यह सैटेलाइट बादलों, अंधेरे और खराब मौसम में भी पृथ्वी की साफ तस्वीरें ले सकता है। आमतौर पर ऑप्टिकल सैटेलाइट बादलों की वजह से काम नहीं कर पाते, लेकिन SAR तकनीक हर मौसम में काम करती है।
भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देश में, जहां अक्सर बादल रहते हैं, यह तकनीक बेहद उपयोगी मानी जा रही है। एक अध्ययन के अनुसार, धरती के ऊपर करीब 70 प्रतिशत क्षेत्र पर हमेशा बादल रहते हैं, जिससे सामान्य सैटेलाइट इमेजिंग प्रभावित होती है। 'दृष्टि' इन दोनों तकनीकों को मिलाकर ज्यादा सटीक और उपयोगी तस्वीरें देगा, जिससे उपयोगकर्ताओं को हर समय भरोसेमंद डेटा मिल सकेगा।
रक्षा और आपदा प्रबंधन में बड़ा उपयोग
इस सैटेलाइट से सीमा निगरानी, रक्षा गतिविधियों, आपदा प्रबंधन, कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर और बीमा जैसे क्षेत्रों में मदद मिलेगी। अगर यह पहले से मौजूद होता, तो भारत अपने सैन्य अभियानों की तस्वीरों के लिए विदेशी सैटेलाइट पर निर्भर नहीं रहता।
हाल के वैश्विक संघर्षों ने भी दिखाया है कि देशों को अपने सैटेलाइट डेटा की जरूरत होती है। इस सैटेलाइट का वजन करीब 190 किलोग्राम है और यह 1.5 मीटर तक की उच्च रिजॉल्यूशन वाली तस्वीरें दे सकता है। भविष्य में इसकी क्षमता को 0.5 मीटर तक बेहतर करने की योजना है।
आगे और सैटेलाइट बनाने की योजना
'दृष्टि' सिर्फ एक सैटेलाइट नहीं है, बल्कि एक बड़े कंस्टीलेशन की शुरुआत है। कंपनी आने वाले चार वर्षों में 8 से 12 सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना बना रही है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक भी शामिल है, जिससे सैटेलाइट खुद ही अंतरिक्ष में डेटा प्रोसेस कर सकेगा और तेजी से उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराएगा।
