आमिर, देवल ब्यूरो ,जौनपुर। शहर के बाजार बुआ मोहल्ले में मरहूम हाजी नूर मोहम्मद करबलाई के मकान से जनाबे मुस्लिम इब्ने अकील की शहादत की याद में मंगलवार को एक भव्य मातमी जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर जनाबे मुस्लिम की कुर्बानी को याद किया और गम का इजहार किया।
मातमी जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए आगे बढ़ा, जहां जगह-जगह लोगों ने जुलूस का इस्तकबाल किया। इस दौरान माहौल पूरी तरह गमगीन रहा और या हुसैन, या मुस्लिम की सदाओं से फिजा गूंज उठी। अकीदतमंदों ने जनाबे मुस्लिम इब्ने अकील की शहादत और उनके संघर्ष को याद करते हुए उन्हें खिराजे अकीदत पेश किया।
जुलूस में शहर की प्रसिद्ध अंजुमनों अंजुमन गुलशन-ए-इस्लाम, अंजुमन जुल्फिकारिया और अंजुमन शमशीरे हैदरी के सदस्यों ने विशेष रूप से भाग लिया। अंजुमनों के नौहाख्वानों ने दर्दभरे नौहे पढ़े, जिन्हें सुनकर उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं। इसके बाद मातमदारों ने सीना-जनी कर जनाबे मुस्लिम की शहादत का गम मनाया।
मजलिस और जुलूस के दौरान उलेमा-ए-किराम ने जनाबे मुस्लिम इब्ने अकील की जिंदगी, उनके सब्र, वफादारी और कुर्बानी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन इंसानियत, सत्य और न्याय के लिए संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से उनके आदर्शों को अपनाने की अपील की।
कार्यक्रम में शहर और आसपास के क्षेत्रों से आए बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोगों ने भाग लिया। जुलूस के समापन पर मुल्क में अमन, भाईचारे और खुशहाली के लिए विशेष दुआ की गई। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद रहा और जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
