कांग्रेस ने केरल के मुख्यमंत्री पद के लिए वीडी सतीशन के नाम का एलान कर दिया है। गुरुवार दोपहर BJP की ओर से इस फैसले पर जैसी उम्मीद थी, तीखे हमले हुए। BJP ने कांग्रेस को सीधे ‘मुस्लिम लीग’ करार देते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के आगे घुटने टेक दिए हैं और 'तुष्टीकरण की राजनीति' अपना रही है।
गुरुवार दोपहर सतीशन के नाम पर मुहर लगते ही 10 दिनों का सस्पेंस खत्म हो गया। 61 वर्षीय सतीशन को जमीनी स्तर का नेता माना जाता है। हालिया विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की शानदार जीत में उनकी भूमिका अहम रही थी। हालांकि, मुख्यमंत्री पद की दौड़ में उन्हें कमजोर दावेदार समझा जा रहा था। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद केसी वेणुगोपाल को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था।
IUML का दबदबा
कांग्रेस ने IUML के समर्थन और वेणुगोपाल को छह महीने के अंदर उपचुनाव लड़ने की मजबूरी को देखते हुए सतीशन को चुना। IUML, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) का अहम हिस्सा है। इसके पास 22 विधायक हैं, जो कांग्रेस की 63 सीटों के बाद दूसरे नंबर पर है।
IUML सतीशन की सबसे बड़ी समर्थक रही है। अगर वेणुगोपाल को चुना जाता तो IUML गठबंधन से बाहर हो सकती थी। हालांकि कांग्रेस 71 सीटों के बहुमत से ऊपर रहती, लेकिन मुस्लिम लीग से मिलने वाला जमीनी समर्थन खो देती। खासकर वायनाड जैसी सीटों पर, जहां 45 प्रतिशत मुस्लिम वोटर हैं और जो प्रियंका गांधी वाड्रा की लोकसभा सीट भी है, IUML का प्रभाव अहम है।
घोषणा के बाद IUML प्रदेश अध्यक्ष सैयद सादिक अली शिहाब थंगल ने सतीशन को बधाई दी। उन्होंने कहा, 'यह फैसला आ गया है और केरल की जनता के साथ हम भी इसे मंजूरी देते हैं। सतीशन सुशासन देने में सक्षम होंगे।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कांग्रेस ने IUML से सलाह ली थी।
‘मुस्लिम लीग’ वाले ताने का इतिहास
BJP का यह हमला नया नहीं है। असम के AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने भी हाल ही में कांग्रेस को ‘मुस्लिम लीग पार्टी’ बताया था। पिछले साल नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कांग्रेस को ‘MMC - मुस्लिम लीग माओवादी कांग्रेस’ करार दिया था।
BJP का कहना है कि कांग्रेस अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की राजनीति कर रही है। हालांकि गठबंधन राजनीति में सहयोगी दलों के दबाव को मानना कोई नई या अजीब बात नहीं मानी जाती। सतीशन के चयन से कांग्रेस के लिए IUML का समर्थन बरकरार रहेगा, लेकिन BJP को विपक्ष पर हमला बोलने का मजबूत मुद्दा मिल गया है।
