पश्चिम बंगाल के चुनाव में भवानीपुर विधानसभा सीट हॉट सीटों में पहले नंबर है। यह सीट टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) का गढ़ मानी जाती है। 2026 के चुनाव में भी 2021 की तरह ही भाजपा प्रत्याशी अधिकारी सुवेंदु और ममता बनर्जी के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है।
यहां आधी मतगणना पूरी होने के बाद ममता बनर्जी आगे चल रही हैं, लेकिन सुवेंदु के बढ़ते वोट टीएमसी के लिए मुसीबत साबित हो सकते हैं। दरअसल, भवानीपुर सीट पर सातवें राउंड की मतगणना में ममता की बढ़त का अंतर 17 हजार से अधिक था, लेकिन 12वें राउंड में यह 7 हजार तक सिमट गई है।
भवानीपुर विधानसभा सीट का इतिहास
पश्चिम बंगाल की राजनीति में कोलकाता की भवानीपुर विधानसभा सीट (159) ममता बनर्जी के लिए एक अभेद्य किला रही है, जो 1951 से अस्तित्व में है। दक्षिण कोलकाता के हिस्से आने वाली यह हाई प्रोफाइल मुकाबले का केंद्र मानी जाती है। जाता है। ममता बनर्जी ने 2011, 2016 और 2021 (उपचुनाव) में लगातार जीत हासिल की है।
बता दें कि 2021 में नंदीग्राम में हार के बाद ममता बनर्जी ने यहां से उप चुनाव लड़ा और 58 हजार से अधिक मतों से रिकॉर्ड अंतर से वापसी की। ममता की इस वापसी टीएमसी के विजेता प्रत्याशी शोभेनदेव चट्टोपध्याय ने इस्तीफा दे दिया था।
भवानीपुर विधानसभा: 2026 के चुनाव का समीकरण
राज्य की सबसे हाई प्रोफाइल भवानीपुर सीट पर इस बार बेहद दिलचस्प मुकाबला है, जहां ममता के विरुद्ध भाजपा की तरफ से उनके पूर्व सहयोगी व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। इस सीट पर पूरे देश की नजर है।
भाजपा ने 2019 लोकसभा चुनाव के बाद से शहरी क्षेत्रों में अपनी पैठ बढ़ाई है, जिसका असर इन सीटों पर भी दिख रहा है। 2021 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव में कोलकाता की कई सीटों पर भाजपा के वोट प्रतिशत में काफी वृद्धि देखी गई।
भवानीपुर लंबे समय से एक तरह का 'मिनी इंडिया' रहा है, जहां स्थानीय बंगालियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में मारवाड़ी और गुजराती व्यापारी, सिख और जैन परिवार और बड़ी तादाद में मुस्लिम मतदाता रहते हैं।
करीब 42 प्रतिशत मतदाता बंगाली हिंदू, 34 प्रतिशत गैर-बंगाली हिंदू और लगभग 24 प्रतिशत मुस्लिम हैं। इसी सामाजिक गणित ने सुवेंदु अधिकारी को ममता को उनके गढ़ में चुनौती देने के लिए प्रेरित किया है।
