आजमगढ़। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) आजमगढ़ की अदालत ने एक गंभीर मामले में पुलिस और अन्य रसूखदार लोगों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कस दिया है। न्यायालय ने ग्राम परशुरामपुर, थाना महाराजगंज निवासी एक कैंसर पीड़ित बुजुर्ग की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए, पुलिसकर्मियों और ग्राम प्रधान सहित कुल 9 लोगों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(4) के तहत प्रस्तुत प्रार्थना पत्र को 'परिवाद' के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है।
मामले की जानकारी देते हुए एडवोकेट सुधांशु राय ने बताया कि पीड़ित 61 वर्षीय लालबहादुर चौरसिया जो कैंसर की बीमारी से जूझ रहे हैं, ने अदालत में गुहार लगाई थी कि उनके छोटे बेटे संदीप की शादी हिंदू रीति-रिवाज से वर्ष 2022 में ज्योति चौरसिया से हुई थी। आरोप है कि इन्दु पासवान नामक महिला उनके बेटे से शादी का झूठा दावा कर जबरदस्ती उनके घर में रहना चाहती है।
पीड़ित का आरोप है कि महाराजगंज थाने की पुलिस ने इन्दु पासवान के प्रभाव में आकर उन्हें और उनके परिवार को प्रताड़ित किया।
आरोप है कि 22 अक्टूबर 2025 को पुलिस उन्हें जबरन थाने ले गई, गाली-गलौज की और दबाव बनाया कि वे इन्दु पासवान को अपने घर में रखें।
उसी रात पुलिसकर्मियों ने गांव के सहयोगियों के साथ मिलकर जबरन प्रार्थी के घर में इन्दु पासवान को घुसा दिया, जो तब से वहीं रह रही है।
विरोध करने पर प्रार्थी को मुकदमे में फंसाने और आत्महत्या की धमकी दी जा रही है।
पीड़ित ने स्थानीय पुलिस और पुलिस अधीक्षक से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने न्यायालय की शरण ली। अदालत ने थाना महाराजगंज से प्राप्त आख्या और प्रार्थी द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्र व साक्ष्यों का अवलोकन किया।
जिसमें इंदु पासवान, महारगंज थाने पर तैनात कांस्टेबल बालेंद्र कुमार यादव, उमा द्विवेदी, अजय यादव, गुड़िया यादव, शैलेष सिंह और ग्राम प्रधान बबलू राय, ग्रामीण आसिफ, श्रवण सोनी के खिलाफ परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया गया।
