देवल, ब्यूरो चीफ,म्योरपुर, सोनभद्र। म्योरपुर विकास खंड के ग्राम पंचायत परनी में एक रिबोरिंग कार्य के नाम पर 95 हजार 980 रुपए के भुगतान ने पूरे ब्लॉक में भ्रष्टाचार की नई बहस छेड़ दी है। ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज भुगतान विवरण सामने आने के बाद ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एक साधारण रिबोरिंग में इतना भारी भरकम खर्च कैसे हो गया। लोगों का आरोप है कि विकास कार्यों की आड़ में सरकारी धन की खुली बंदरबांट की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत परनी में रामजीत के घर के पास कराए गए रिबोरिंग कार्य के लिए 04 फरवरी 2026 को ऑनलाइन वाउचर के माध्यम से
95,980 रुपए का भुगतान दर्शाया गया है। हैरानी की बात यह है कि गांव के लोगों को न तो कार्य की वास्तविक लागत की जानकारी है और न ही किसी अधिकारी द्वारा इसकी पारदर्शिता सुनिश्चित की गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सिर्फ रिबोरिंग में ही लगभग एक लाख रुपये खर्च हो रहे हैं तो नई बोरिंग में कितनी रकम का खेल होता होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। क्षेत्र में चर्चा है कि ब्लॉक स्तर पर फर्जी और बढ़े-चढ़े इस्टीमेट बनाकर सरकारी धन को ठिकाने लगाने का खेल लंबे समय से जारी है। मामले में जब ग्राम पंचायत सचिव राघवेन्द्र कुमार से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन तक रिसीव नहीं किया। इससे ग्रामीणों के शक और गहरा गए हैं। लोगों का आरोप है कि ऊपर से नीचे तक कमीशनखोरी की जड़ें इतनी मजबूत हो चुकी हैं कि बिना मिलीभगत के इतने बड़े भुगतान संभव ही नहीं हैं। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि कई विकास कार्य सिर्फ कागजों में पूरे दिखाकर भुगतान निकाल लिया जाता है, जबकि धरातल पर कार्य की गुणवत्ता और लागत दोनों सवालों के घेरे में रहती हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही यह भी कहा कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर रोक नहीं लगी तो विकास योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती रहेंगी।
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