देवल संवाददाता, बलिया में निजी अस्पतालों में हुई मौतों के विरोध में गुरुवार को विभिन्न कॉलेजों के छात्रों ने प्रदर्शन किया। छात्रों ने अपूर्वा नर्सिंग होम के डॉक्टरों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए जिला प्रशासन का प्रतीकात्मक पुतला भी फूंका।
आक्रोशित छात्रों ने सतीश चंद्र और टीडी कॉलेज चौराहा के पास पुतला दहन किया। वहीं, कुंवर सिंह डिग्री कॉलेज के सामने पुतला फूंकने जुटे छात्रों से पुलिस ने पुतला छीन लिया, जिसके बाद पुलिस और छात्रों के बीच नोकझोंक भी हुई। इस दौरान छात्रों ने "जिला प्रशासन मुर्दाबाद" के नारे लगाए।
यह विरोध प्रदर्शन शहर के विभिन्न निजी चिकित्सालयों में हुई मौतों के बाद हो रहा है। 14 मार्च को पूर्वांचल हॉस्पिटल में जच्चा और जुड़वा बच्चियों की मौत हो गई थी, और बच्चियों के शव अस्पताल के बाथरूम में डस्टबिन में मिले थे। इस घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने हंगामा किया था, जिसके बाद आरोपी चिकित्सक को गिरफ्तार किया गया था।
इसके अतिरिक्त, जीरा बस्ती स्थित आकाश नर्सिंग होम में ऑपरेशन के बाद एक प्रसूता की मौत हो गई थी। इस मामले में भी चिकित्सक को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायालय भेज दिया था।
हाल ही में, दस दिन पहले शहर के अपूर्वा नर्सिंग होम में पथरी के ऑपरेशन के दौरान सुखपुरा थाना क्षेत्र के देवकली निवासी अनीषा राय (24) की मौत हो गई थी। पीड़ित परिवार की तहरीर पर डॉ. ज्योत्स्ना सिंह, डॉ. अपूर्वा सिंह, डॉ. दीपक सिंह, डॉ. संजय सिंह और डॉ. रोहन गुप्ता सहित पांच चिकित्सकों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर को सील कर दिया और महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाने के लिए सीसीटीवी फुटेज जब्त कर ली।
छात्र नेता रमेश गिरी ने गुरुवार को बताया कि यह पुतला दहन इसलिए किया गया है क्योंकि पिछले महीने डॉक्टरों द्वारा तीन हत्याएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि हत्या का मुकदमा दर्ज होने के बावजूद दोषी चिकित्सकों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। छात्रों ने जिला प्रशासन से इन चिकित्सकों को गिरफ्तार करने और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग की।
सोनवानी, टीडी कॉलेज और सतीश चंद्र कॉलेज के छात्रों ने भी इस विरोध में भाग लिया। छात्रों ने पहले कैंडल मार्च भी निकाला था, जिसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर अपूर्वा नर्सिंग होम को सील किया गया था। छात्रों का कहना है कि मुकदमा दर्ज होने के बावजूद अब तक डॉक्टरों की गिरफ्तारी नहीं हुई है।