हाइवे पर बेधड़क दौड़ रहे ओवरलोड उप खनिज लदे अनफिट वाहन, हो रहे हादसे
देवल, ब्यूरो चीफ,सोनभद्र। जिला मुख्यालय के शहरी इलाकों में ट्रैफिक नियमों को लेकर सख्ती का डंका पीटने वाली यातायात पुलिस की कार्यशैली इन दिनों सवालों के घेरे में है। शहर में एक तरफ जहां हेलमेट न पहनने या कागजात में मामूली कमी पर बाइक सवारों का धड़ाधड़ ई-चालान किया जा रहा है, तो वहीं, दूसरी तरफ हाईवे पर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए ओवरलोड अनफिट वाहन फर्राटा भर रहे हैं। शहर में सख्ती और हाईवे पर ढिलाई से लोगों में यातायात पुलिस के प्रति आकोश है।
हकीकत यह है कि जिले से गुजरने वाले हाईवे पर करीब आधा दर्जन से अधिक पुलिस थाना क्षेत्र से होकर रोजाना सैकड़ों ओवरलोड ट्रकें और डंपर बेखौफ दौड़ रहे हैं। इन वाहनों में न तो मानक के अनुरूप लोडिंग होती है, और न ही कई के फिटनेस प्रमाणपत्र वैध होते हैं। बावजूद इसके अनफिट वाहनों पर कार्रवाई शुन्य के बराबर है। जबकि देखा जाए तो हाइवे पर अनफिट वाहनों के संचालन से ही आएदिन कहीं न कहीं सड़क हादसे होते रहते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहर के अंदर ट्रैफिक पुलिस केवल आसान टारगेट पर ध्यान दे रही है। खासकर बाइक सवारों का ई-चालान कर संबंधित पुलिस कर्मी वाहवाही लूट रहे हैं। लेकिन वहीं, हाईवे पर बड़े वाहनों के खिलाफ कार्रवाई न के बराबर है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या नियम कानून केवल छोटे वाहन चालकों के लिए ही हैं। लोगों का मानना है कि ओवरलोड वाहन न सिर्फ सड़क को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि बड़े हादसों का कारण भी बनते हैं। इसके बावजूद इन पर कार्रवाई में ढिलाई गंभीर चिंता का विषय है। हाल के वर्षों में कई सड़क हादसों में ओवरलोड ट्रकों की भूमिका सामने आ चुकी है। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस-प्रशासन वास्तव में सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं, तो कार्रवाई में संतुलन जरूरी है। शहर में सख्ती और हाईवे पर ढिलाई यह दोहरा रवैया न केवल व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि आम जनता का भरोसा भी कमजोर करता है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मुद्दे पर संज्ञान लेते हैं या फिर चालान की सख्ती सिर्फ शहर की सड़कों तक ही सीमित रह जाती है। उधर यातायात प्रभारी निरीक्षक से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन वे मौजूद नहीं मिले। लिहाजा उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।
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