आमिर, देवल ब्यूरो ,जौनपुर।उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरुण कुमार सिंह मुन्ना का सोमवार को प्रयागराज के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे 81 वर्ष के थे और पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही जौनपुर समेत पूरे प्रदेश के राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई।
उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव रामनगर, मुंगराबादशाहपुर लाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में समर्थकों और क्षेत्रीय लोगों की भीड़ उमड़ी। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार को सुबह करीब 11 बजे रसूलाबाद घाट पर किया जाएगा।
अरुण कुमार सिंह ‘मुन्ना’ का राजनीतिक जीवन बेहद सक्रिय और संघर्षपूर्ण रहा। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1969 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से की। उसी वर्ष वे छात्र नेता चुने गए और अपनी प्रभावशाली वक्तृत्व शैली व जनहित से जुड़े मुद्दों के कारण युवाओं में तेजी से लोकप्रिय हुए। वर्ष 1971 में उन्होंने विश्वविद्यालय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और 1974 में वे विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) बनाए गए।
वर्ष 1977 में मछलीशहर विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित होकर उन्होंने प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई। इसके बाद वे कई वर्षों तक विधानसभा में जनता का प्रतिनिधित्व करते रहे। 1980 और 1990 के दशक में वे उत्तर प्रदेश सरकार में सहकारिता विभाग के कैबिनेट मंत्री रहे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने पूर्वांचल क्षेत्र में सड़क, पुल, सिंचाई, उच्च शिक्षा और सहकारी संस्थाओं के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं को आगे बढ़ाया।
बाद में वर्ष 1991 में वे रारी विधानसभा क्षेत्र से भी विधायक चुने गए। वे कांग्रेस पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहे और वर्ष 2003 से 2005 तक उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।
हालांकि उन्होंने 1996 में जौनपुर सदर लोकसभा सीट और 1998 में मछलीशहर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद वे आजीवन कांग्रेस पार्टी के प्रति समर्पित रहे और अंतिम समय तक संगठन से जुड़े रहे।
उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और गणमान्य व्यक्तियों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे अपूरणीय क्षति बताया है।
