कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।धान खरीद का सीजन खत्म हुए ढाई महीने बीत गए, लेकिन सरकारी चावल अभी भी 10 राइस मिलरों के गोदामों में बंद पड़े हैं। कुल 6000 क्विंटल चावल विभाग को सुपुर्द नहीं किया गया। विपणन विभाग अब सख्त हो गया है—मिलरों को चिह्नित कर लिया गया है और लापरवाह अधिकारियों पर भी नोटिस की बौछार शुरू हो गई है।जनवरी में ही धान खरीद पूरी हो गई थी क्योंकि यहां सबसे ज्यादा क्रय केंद्र लगे थे। निर्धारित समय 28 फरवरी से पहले काम निपट गया, लेकिन उसके बाद मिलरों ने चावल देने में आनाकानी शुरू कर दी। कई बार नोटिस दिए गए, बार-बार बातचीत हुई, फिर भी भारतीय खाद्य निगम को तय मात्रा का चावल नहीं पहुंचाया गया।जिला खाद्य विपणन अधिकारी गोरखनाथ त्रिपाठी ने इस लापरवाही पर तुरंत एक्शन लिया। चार विपणन निरीक्षकों—अविनाश सोनकर, प्रवीण सिंह, संतोष यादव और रमेश यादव—को नोटिस थमा दिया गया है। उन्हें साफ निर्देश है कि 30 अप्रैल तक बकाया चावल गोदाम तक पहुंचा दो, वरना विभागीय कार्रवाई शुरू हो जाएगी।विभाग का रुख अब बिल्कुल सख्त है—चावल न पहुंचा तो मिलरों और संबंधित अधिकारियों दोनों पर गाज गिरेगी। किसानों का पैसा और सरकारी अनाज दोनों दांव पर हैं, ऐसे में ये देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।अंबेडकरनगर में ये मामला अब सुर्खियों में है और लोग सवाल पूछ रहे हैं—क्या मिलरों के पास चावल सच में दबा हुआ है या फिर कोई और खेल चल रहा है? 30 अप्रैल डेडलाइन है, अब देखना होगा कि मिलर और निरीक्षक इस बार समय पर चावल पहुंचाते हैं या नहीं।
