देवल, ब्यूरो चीफ,सोनभद्र। विश्व गौरैया दिवस पर उत्सव ट्रस्ट सोनभद्र के सौजन्य से आशीष पाठक एडवोकेट के आवास पर शुक्रवार शाम कविताओं की महफिल सजी, जिसमें गौरैया संरक्षण पर्यावरण को संदर्भित बेहतरीन रचनाओं से कवियों ने आयोजन में चार चांद लगाए और लोगों को सोचने पर मजबूर किया। आयोजन की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार रामनाथ शिवेन्द्र ने किया। वाणी वंदना करते हुए प्रदुम्न त्रिपाठी एडवोकेट निदेशक शहीद स्थल करारी ने तम हर जग मां जगमग कर दे तथा चहकति चिरैया बगिया गुंजार करै, मन नाहीं भरत रहे देखि सुघराई से विधिवत आयोजन का आगाज हुआ। कौशल्या कुमारी चौहान ने अपनी रचना, जिनगी के थाती परान गौरैया, गुम कहां भैलीं बचावा एकरा भैया सुनाकर वातावरण में सार्थक संदेश दिया और महफिल रौनक किया। कवि धर्मेश चौहान एडवोकेट ने मानव जीवन की सबसे बड़ी हार, पर्यावरण से क्यों नहीं करते हो प्यार, सुनाकर सोचने पर विवश कर दिया। सफल संचालन करते हुए
शायर अशोक तिवारी एडवोकेट ने गौरेया मानव जीवन की पहचान है, क्यों गायब है सोचकर हैरान हैं सुनाकर ज्वलंत मुद्दा उठाया। सोन संगीत फाउंडेशन के सुशील मिश्रा ने लोकगीत, घन बसवरिया पीपर पाती डार डार हरियाइल सुनाकर माहौल को ऊंचाई दिया।
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