देवल संवाददाता, बलिया कलक्ट्रेट में सोमवार को क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के सदस्यों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने राष्ट्रपति को संबोधित तीन सूत्रीय मांग पत्र जिलाधिकारी प्रतिनिधि को सौंपा। प्रदर्शन का मुख्य कारण चुनाव आयोग द्वारा मतदाता शुद्धिकरण के नाम पर की जा रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया थी, जिसे संगठन ने नागरिकता परीक्षण की दिशा में एक कदम बताया।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यह एसआईआर प्रक्रिया परोक्ष रूप से मतदाताओं को संदिग्ध नागरिक घोषित करती है। इसके माध्यम से मतदाता सूची से बाहर होने वाले या अयोग्य करार दिए गए मतदाताओं पर संदिग्ध नागरिक होने की तलवार लटकी रहती है। यह प्रक्रिया निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) को विवेकाधिकार देती है, जिससे वह अपने विवेक के आधार पर किसी को भी मतदाता सूची से बाहर कर सकता है।
संगठन के सदस्यों ने कहा कि यह एसआईआर अभी तो नहीं, लेकिन भविष्य में मतदाताओं से दस्तावेज दिखाने की मांग करता है, जो अंततः नागरिकता परीक्षण का रास्ता खोल देता है। उन्होंने असम में हुए नागरिकता परीक्षण के परिणामों का हवाला दिया, जहां 19 लाख लोगों (13 लाख हिंदू और 6 लाख मुस्लिम) को नागरिकता के दायरे से बाहर कर शरणार्थियों की स्थिति में धकेल दिया गया था।
दर्शनकारियों ने इस विशेष गहन पुनरीक्षण में संवैधानिक न्यायिक प्रक्रिया को उलटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने मनमाने तरीके से नागरिकता के दस्तावेज तय किए हैं। आधार कार्ड, वोटर कार्ड (जो स्वयं नागरिक होने का प्रमाण है) और राशन कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को नागरिकता के सबूत के रूप में अस्वीकार कर दिया गया है।
संगठन का तर्क है कि आयोग ने परोक्ष रूप से देश के करोड़ों आम नागरिकों को संदिग्ध घोषित कर दिया है और नागरिक होने के सबूत जुटाने का बोझ इन्हीं संदिग्ध घोषित किए गए नागरिकों पर डाल दिया है। यह स्थिति स्वयं में 2003 के बाद हुए चुनावों और चुनी गई सरकारों की वैधता पर सवाल खड़े करती है, क्योंकि यदि नागरिक संदिग्ध हैं, तो उनके मतों से चुनी हुई सरकार और चुनाव आयोग कैसे वैध हो सकते हैं।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि आधार कार्ड, वोटर कार्ड और राशन कार्ड को भी नागरिकता का आधार बनाया जाए। मतदाता होने के लिए पहले की तरह शपथ पत्र और स्वघोषणा को आधार माना जाए। मतदाता शुद्धिकरण के लिए केवल डी-डुप्लीकेशन सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाए और इसके लिए नियमित समय पर होने वाले समरी परीक्षण पर जोर दिया जाए।
