देवल संवाददाता, मऊ। जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र ने जनपद के समस्त न्यायालयों में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 34 (नामांतरण) एवं धारा 24 (पैमाइश)के समय सीमा के उपरांत लंबित वादों की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान तहसील मधुबन के तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार कोर्ट की स्थिति सबसे खराब पाई गई। तहसील घोसी एवं मोहम्मदाबाद गोहना के न्यायालयों द्वारा धारा 34 एवं 24 में वादों के निस्तारण की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई। तहसील सदर की स्थिति सबसे बेहतर रही। धारा 34 की समीक्षा के दौरान सबसे बेहतर स्थिति नायब तहसीलदार कोर्ट मऊनाथ भंजन की जहां 1 वर्ष से अधिक एवं 3 वर्ष से कम अवधि के लंबित वादों की संख्या मात्र एक रही जबकि नायब तहसीलदार कोपागंज, तहसीलदार एवं तहसीलदार न्यायिक समेत तहसील सदर में 1 वर्ष से अधिक के कुल 11 वाद निस्तारित करने को अवशेष हैं। तीन एवं पांच वर्ष के उपरांत एक भी वाद तहसील सदर में लंबित नहीं पाए गए। तहसील मधुबन में धारा 34 के तहत 1 वर्ष से अधिक एवं 3 वर्ष से कम अवधि के अभी भी 162 वाद लंबित पाए गए जिसमें नायब तहसीलदार कोर्ट में 39, तहसीलदार कोर्ट में 63 तथा तहसीलदार न्यायिक कोर्ट में कुल 60 वाद अभी भी लंबित थे। इसी प्रकार तहसील मोहम्मदाबाद गोहना में भी 112 वाद लंबित पाए गए जो 1 वर्ष से अधिक समय से लंबित है। इनमें तहसीलदार कोर्ट में 59,नायब तहसीलदार कोर्ट में 30 तथा तहसीलदार न्यायिक कोर्ट में 23 वाद अभी भी लंबित है। समीक्षा के दौरान पूरे जनपद में धारा 34 (नामांतरण) के अंतर्गत निर्धारित समय सीमा 45 दिन से अधिक कुल 620 प्रकरण अभी भी लंबित हैं जिनमें से एक वर्ष से अधिक एवं 3 वर्ष से कम अवधि वाले कुल 353 वाद अभी भी निस्तारित करने हेतु लंबित है। जिलाधिकारी ने इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए 1 वर्ष से ऊपर के समस्त लंबित मामलों का तत्काल निस्तारण करने के निर्देश दिए। जिन पीठासीन अधिकारियों के न्यायालय में एक वर्ष से ऊपर के प्रकरण लंबित पाए जाएंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी जिलाधिकारी ने दी। तहसील मधुबन में खराब स्थिति को देखते हुए उन्होंने तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार को चेतावनी देते हुए कहा कि वादों के निस्तारण में तेजी लाएं,अन्यथा अध्यक्ष,राजस्व परिषद बोर्ड के निर्देशानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। तहसील सदर में नायब तहसीलदार कोर्ट में 6 माह से 1 वर्ष के बीच में मात्र एक बार लंबित पाया जाएगा जिसकी जिलाधिकारी ने सराहना भी की। उन्होंने समस्त पीठासीन अधिकारियों को निर्देश दिए की धारा 34 के समस्त वादों का तत्काल निस्तारण सुनिश्चित करें,जिससे आम जनता को कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। इसके अलावा बिना ठोस आपत्ति के अगर कोई पत्रावली लंबित पाई जाती है तो संबंधित पीठासीन अधिकारी का उत्तरदायित्व सुनिश्चित करते हुए कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसी प्रकार 3 वर्ष से अधिक एवं 5 वर्ष से कम अवधि के लंबित वादों की कुल संख्या जनपद में 32 पाई गई जिसे तत्काल निस्तारित करने के निर्देश जिलाधिकारी द्वारा दी गई। जिलाधिकारी ने कहा कि 3 वर्ष से भी अधिक समय के बाद अगर वाद निस्तारित नहीं होते हैं तो यह संबंधित पीठासीन अधिकारी की शिथिलता का द्योतक है। आगामी कार्य दिवसों में वादों के निस्तारण में तेजी लाते हुए समस्त लंबित वादों के निस्तारित करने के निर्देश उन्होंने दिए। इस कार्य हेतु अभियान मोड में कार्य करने के निर्देश जिला अधिकारी द्वारा दिए गए। समीक्षा के दौरान कुछ वादों के निस्तारण में कानूनगो एवं लेखपालों द्वारा समय से आख्या प्रेषित ना करने के कारण वाद लंबित मिले। इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने समस्त उप जिलाधिकारियों एवं तहसीलदारों को सख्त निर्देश दिए कि जो भी कानूनगो एवं लेखपाल समय से आख्या प्रेषित नहीं कर रहे हैं उन्हें चिन्हित करते हुए तत्काल उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 24 की समीक्षा के दौरान उन्होंने समस्त संबंधित पीठासीन अधिकारियों को आवेदन के क्रम में वादों का यथाशीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। इसके अलावा जिलाधिकारी ने रबी फसल की कटाई के उपरांत समस्त पारित आदेशों का मौके पर अनुपालन भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि धारा 34 (नामांतरण) एवं धारा 24 (पैमाइश) के लंबित प्रकरणों में संबंधित पीठासीन अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। अतः समस्त संबंधित पीठासीन अधिकारी समय सीमा के उपरांत समस्त लंबित प्रकरणों का तत्काल निस्तारण सुनिश्चित करें अन्यथा उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए विभागीय कार्रवाई हेतु राजस्व परिषद बोर्ड को पत्र प्रेषित कर दिया जाएगा,जिसके जिम्मेदार संबंधित पीठासीन अधिकारी होंगे।
समय से आख्या प्रेषित न करने पर संबंधित लेखपाल एवं कानूनगो के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई - जिलाधिकारी
मार्च 24, 2026
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