देवल, ब्यूरो चीफ,म्योरपुर, सोनभद्र। खनिज संपदा से समृद्ध सोनभद्र जिले में सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों में माइनिंग डिप्लोमा कोर्स संचालित न होने से यहां के युवाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस कोर्स की पढ़ाई करने के लिए छात्रों को प्रदेश के अन्य जिलों अथवा दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के कई छात्र इस तकनीकी शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।
जिला आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण यहां के अधिकांश युवाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होती। ऐसे में सैकड़ों किलोमीटर दूर जाकर पढ़ाई करना उनके लिए संभव नहीं हो पाता। जबकि सोनभद्र में कई बड़े सरकारी और निजी औद्योगिक प्रतिष्ठान संचालित हैं, जहां खनन कार्य बड़े पैमाने पर होता है। ओबरा और डाला क्षेत्र में पत्थर की खदानों के साथ-साथ कई कोयला परियोजनाएं भी संचालित हैं, जिससे खनन क्षेत्र में रोजगार की अच्छी संभावनाएं मौजूद हैं। डिप्लोमा के पूर्व छात्र एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत दुबे (बाबा) ने बताया कि माइनिंग कोर्स करने के लिए छात्रों को लगभग 700 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। अधिकांश छात्र ट्रेन से लंबी यात्रा कर पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं, जिससे उन्हें सर्दी और अन्य मौसम में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान समय में सरकारी स्तर पर तीन वर्षीय माइनिंग डिप्लोमा पाठ्यक्रम केवल ललितपुर जिले के तालबेहट स्थित सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में संचालित है। ऐसे में पूर्वांचल और खासकर सोनभद्र के छात्रों को पढ़ाई के लिए दूर जाना पड़ता है।
.jpeg)