आमिर, देवल ब्यूरो ,जौनपुर। ग्राम पंचायत चुनाव में विरोध करना एक 75 वर्षीय बुजुर्ग को भारी पड़ गया। आरोप है कि चुनावी रंजिश के चलते मौजूदा ग्राम प्रधान ने ग्राम पंचायत सचिव के साथ मिलकर जिंदा बुजुर्ग को सरकारी अभिलेखों में मृत घोषित करा दिया, जिसके कारण उनकी वृद्धावस्था पेंशन बंद हो गई। पीड़ित बुजुर्ग ने जिला मुख्यालय पहुंचकर जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है। जिलाधिकारी ने मामले की जांच के आदेश देने का आश्वासन दिया है।
मामला केराकत तहसील क्षेत्र के भितरी गांव का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार गांव निवासी 75 वर्षीय सलपू यादव ने हाल ही में संपन्न हुए ग्राम पंचायत चुनाव में मौजूदा प्रधान विपिन कुमार राय का विरोध करते हुए दूसरे प्रत्याशी का समर्थन किया था। आरोप है कि इसी रंजिश के चलते उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्शा दिया गया।
बताया जाता है कि इस कथित हेराफेरी के बाद शासन की वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत मिलने वाली मासिक पेंशन अचानक बंद हो गई। जब सलपू यादव ने संबंधित विभाग में जानकारी की, तो उन्हें बताया गया कि सरकारी दस्तावेजों में उनका नाम मृतक के रूप में दर्ज है। यह जानकारी मिलते ही परिवार में हड़कंप मच गया और बुजुर्ग गहरे सदमे में आ गए।
शुक्रवार को सलपू यादव स्वयं जिला मुख्यालय पहुंचे और जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र को संबोधित प्रार्थना पत्र सौंपा। जिलाधिकारी कार्यालय से बाहर निकलते समय उन्होंने अपनी व्यथा सुनाते हुए आरोप लगाया कि चुनाव में विरोध करने की वजह से बदले की भावना से यह साजिश रची गई है। उनका कहना है कि पेंशन बंद होने से उनकी आजीविका पर सीधा प्रभाव पड़ा है और वे आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
प्रार्थना पत्र में बुजुर्ग ने ग्राम प्रधान एवं ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए तत्काल पेंशन बहाल करने की अपील की है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्च अधिकारियों से भी न्याय की गुहार लगाएंगे।
जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार संबंधित विभाग से अभिलेख तलब किए गए हैं और पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है।
इस घटना को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों में भी आक्रोश व्याप्त है। उनका कहना है कि यदि किसी जीवित व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखाया जा सकता है, तो यह प्रशासनिक तंत्र की गंभीर चूक और दुरुपयोग का मामला है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ धोखाधड़ी एवं सरकारी अभिलेखों में हेराफेरी का मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन इस प्रकरण में क्या ठोस कदम उठाता है।