कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।गांवों में महिला किसानों को शिक्षित संगठित व जागरूक कर उन्हें पर्यावरण संरक्षण जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों पर दक्ष बनाने के साथ उन्हें स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर बनाने के सामाजिक कार्यकर्ताओं का सामुदायिक संगठन निर्माण पर एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन मां फूला देवी शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान पांती में सम्पन्न हुआ। जहां पर 15 महिला पुरुष सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रतिभागिता किया।
पानी संस्थान अयोध्या के निर्देशन में रोहिनी नीलेकनि फिलोनथ्रोपीस फाउंडेशन के सहयोग से जन विकास केन्द्र भितरीडीह अम्बेडकरनगर द्वारा विकासखंड कटेहरी में संचालित मौसम परियोजना के अन्तर्गत आयोजित प्रशिक्षण को सम्बोधित करती हुई सचिव गायत्री ने कहा कि महिला किसानों का सशक्त होना ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और लैंगिक समानता के लिए अत्यंत आवश्यक है। वे कृषि कार्यों का लगभग 65-70% काम करती हैं, फिर भी उन्हें संसाधनों व निर्णयों में सीमित अधिकार मिलते हैं। महिला किसानों के सशक्तिकरण से उत्पादकता में 2.5-4% वृद्धि, कुपोषण में कमी, व बेहतर परिवार पोषण के साथ आत्मनिर्भरता संभव है।
मानवाधिकार रक्षक मनोज कुमार ने बताया कि कृषि के समावेशी विकास को प्राप्त करने के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण आवश्यक है जिसके लिए उनकी भागीदारी, लैंगिक पहलू, मशक्कत और स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जानकारियों का होना जरूरी है। इन विषयों को लैंगिक दृष्टिकोण से उपयोगी तकनीक, उसके परिष्कृत रूप और प्रसार के तरीकों से समझा जा सकता है। कृषि में महिलाओं की भूमिका बहुआयामी है। वे किसान, श्रमिक, देखभालकर्ता और नेता के रूप में कार्य करती हैं। वे फसलें उगाती हैं, पशुपालन करती हैं, खाद्य उत्पादन का प्रबंधन करती हैं और घरेलू एवं राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
प्रशिक्षक सुखविंदर सिंह जी ने लोगों को संगठन की आवश्यकता महत्त्व और कृषि में महिलाओं के नवाचार और मौसम के अनुरूप कृषि पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया। प्रशिक्षक अभय सिंह जी ने कहा कि महिला किसानों का संगठित होना कृषि में उनके योगदान को मान्यता दिलाने, भूमि स्वामित्व ऋण, तकनीक, और सरकारी योजनाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है। यह उन्हें निर्णय लेने की शक्ति, सामूहिक सौदेबाजी (बेहतर मूल्य), और शोषण से मुक्ति प्रदान करता है। प्रशिक्षक अभिषेक जी ने कहा कि महिलाएं आर्थिक रूप से तभी सशक्त होती हैं जब उनके पास संसाधनों तक पहुंच होती है और उनके पास अपने संसाधनों के बारे में आर्थिक निर्णय लेने की शक्ति और स्वायत्तता होती है।
चर्चा वार्ता अभिव्यक्ति फिल्म शो व संगीत के माध्यम से चले प्रशिक्षण में लोगों ने महिला किसानों की पहचान उनकी समस्याएं कृषि क्षेत्र में उनके योगदान तकनीकि ज्ञान जरूरी संसाधन मौसम के अनुरूप खेती खेती में नवाचार के साथ गांवों में सामुदायिक संगठन निर्माण पर महत्वपूर्ण सीख हासिल किया।
प्रशिक्षण को सफल बनाने में कुसुम, शकुंतला यादव, गुलशनबानो, शकुंतला विश्वकर्मा, अनुपम यादव, छोटेलाल, अनुपम, करिश्मा, निरकला गुलशन कुमार आदि ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।