देवल, ब्यूरो चीफ,म्योरपुर, सोनभद्र। म्योरपुर कस्बा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में स्वास्थ्य सेवाएं इन दिनों बदहाल स्थिति में पहुंच गई हैं। जिले में जिला अस्पताल के अलावा एकमात्र 12 बेड वाला सीएससी (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) म्योरपुर में संचालित है, जो लगभग दो महीने से विशेषज्ञ डॉक्टरों के बिना ही चल रहा है। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी का सीधा असर क्षेत्र के निर्धन व आदिवासी ग्रामीणों पर पड़ रहा है। स्थिति यह है कि सामान्य बीमारियों के मरीजों को भी जिला अस्पताल रेफर कर दिया जा रहा है। दूरी और आर्थिक तंगी के कारण कई ग्रामीण मजबूरी में झोलाछाप डाक्टरों से इलाज कराने को विवश हैं। सीएचसी की ओपीडी होमियोपैथिक चिकित्सक के भरोसे चल रही है, जिससे मरीजों की लंबी कतारें रोज देखने को मिल रही हैं। म्योरपुर सीएचसी लगभग तीन दर्जन गांवों के लिए उपचार का एकमात्र सरकारी केंद्र है, लेकिन सरकार द्वारा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के किए जा रहे दावे यहां खोखले साबित हो रहे हैं। सीएचसी में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद तकनीशियन न होने के कारण इनका लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि चिकित्सकों की अनुपस्थिति के चलते झोलाछाप डाक्टरों और मेडिकल स्टोरों का धंधा फल-फूल रहा है। कुछ लोगों ने झोलाछाप चिकित्सकों और सीएचसी के बीच मौन सहमति होने की भी आशंका जताई है।
