देवल संवाददाता,मऊ। एडीएम अपर जिलाधिकारी सत्यप्रिय सिंह की अध्यक्षता में जनपद स्तरीय खाद्य सुरक्षा सलाहकार समिति की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में संपन्न हुई। बैठक के दौरान खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन द्वारा की गई प्रवर्तन कार्यवाही की समीक्षा की गई। बैठक के दौरान मिलावटी खाद्य पदार्थों के विक्रय पर रोक लगाने तथा खाद्य पदार्थों के निर्माण, थोक और फुटकर प्रतिष्ठानों के निरीक्षण और छापेमारी तथा मिलावटी खाद्य पदार्थों के विक्रय पर रोक लगाने के निर्देश ऊपर जिलाधिकारी द्वारा दिए गए।अभिहित अधिकारी सुरेश कुमार मिश्र ने बताया कि ईट राइट कैंपस योजना के अंतर्गत जनपद स्थित शासकीय/अर्ध शासकीय कार्यालयों/निजी प्रतिष्ठानों को इस योजना के अंतर्गत स्वास्थ्य वर्धक, सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन के संबंध में जागरूक करते हुए स्वस्थ खान-पान की आदतों को विकसित किया जाना। ईट राइट स्कूल योजना के तहत विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को स्वस्थ वर्धक,सुरक्षित और पौष्टिक भोजन के संबंध में जागरूक करते हुए स्वस्थ खान-पान की आदतों को विकसित किया जाना। भोग योजना के अंतर्गत धार्मिक स्थलों में प्रसाद एवं भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए इस कार्य में कारोबारी को प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। ईट राइट स्टेशन योजना के अंतर्गत जनपद में रेलवे स्टेशनों पर स्थित खाद्य प्रतिष्ठानों को यात्रियों के लिए सुरक्षित और पौष्टिक भोजन प्रदान करने हेतु जागरूक एवं प्रशिक्षित किए जाने सहित विभाग द्वारा चलाए जा रहे अन्य योजनाओं के बारे में विस्तार पूर्वक बताया गया।
इसके अलावा उन्होंने बताया कि समस्त खाद्य पदार्थ पर कृत परिवर्तन कार्रवाई माह दिसंबर 2025 तक किए गए कुल निरीक्षक 1595, छापे किए गए 394, संग्रहित नमूने 421, प्राप्त जांच रिपोर्ट 222, अधोमानक 104, असुरक्षित 33 तथा 140 नमूने मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। इसी प्रकार सुरक्षा कार्यों की अभियोजन संबंधी सूचना माह दिसंबर 2025 तक अपर जिलाधिकारी कोर्ट के माध्यम से 34 लाख 66 हजार रूपए एवं खाद्य पदार्थ दूध में 6 लाख 35 हजार रूपए का अर्थ दंड लगाया गया। अपर जिलाधिकारी ने कहा कि यदि मिलावटी कारोबारियों पर रोक नहीं लगी और जांच के दौरान मिलावट पाई गई तो मुकदमा दर्ज कर अर्थ दण्ड सहित अन्य कार्यवाही की जाएगी।गुणवत्ता की दृष्टिगत अपर जिलाधिकारी ने कहा कि कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में बनाए जाने वाले भोज्य पदार्थों का गुणवत्ता युक्त होने तथा उसकी नियमित जांच करने के निर्देश खाद्य सुरक्षा अधिकारी को दिए।औषधि अनुभाग द्वारा बैठक के बताया गया कि जनपद के लोगों को अच्छी गुणवत्ता और शुद्धता के साथ सुरक्षित औषधियां प्रदान करने के लिए विभाग के औषधि अनुभाग को कार्य सौंप गए हैं। जिसके अंतर्गत एलोपैथिक औषधि विक्रय प्रतिष्ठानों का लाइसेंस/नियंत्रण,ब्लड बैंक का निरीक्षण, वैध लाइसेंस के बिना दवाओं के किसी भी निर्माण और बिक्री का पता लगाना,दवाओं की गुणवत्ता और प्रभावकारिता की जांच करने के लिए उनके नमूने एकत्र करना,लाइसेंस शर्तों के उल्लंघन के लिए दवा निर्माताओं और विक्रेताओं के विरुद्ध अधिनियम के अनुरूप विधिक कार्रवाई किए जाने का प्राविधान है। उन्होंने बताया कि आम जनमानस को अच्छी गुणवत्ता और शुद्धता के साथ सुरक्षित औषधियां प्रदान करने के लिए विभाग की औषधि अनुभाग द्वारा एलोपैथिक, होम्योपैथिक ड्रग्स और कॉस्मेटिक निर्माण इकाइयों व औषधि विक्रय प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया जाता है। इसके दौरान निरीक्षण में संदिग्ध औषधियों को नियमानुसार एकत्र कर राजकीय विश्लेषक उत्तर प्रदेश को जांच एवं प्रशिक्षण हेतु प्रेषित किया जाता है। राज्य औषधि विश्लेषक से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर औषधियों के स्पूरियस/अधोमानक/मिस ब्रांडेड पाए जाने पर नियमानुसार प्रकरण की विवेचना कर सक्षम न्यायालय में वाद दायर किया जाता है एवं विभागीय कार्रवाई हेतु मुख्यालय को प्रेषित किया जाता है। उन्होंने बताया कि जनपद में थोक औषधि विक्रय लाइसेंस की संख्या 1444, फुटकर औषधि विक्रय लाइसेंस की संख्या 1454 है तथा जनपद में स्थित कुल जन औषधि केंद्रों की संख्या 42 है।
अपर जिलाधिकारी ने बताया कि जन औषधि केंद्रों की दवाइयों की गुणवत्ता के संबंध में कई अध्ययन हुए हैं। इन अध्ययनों से पता चलता है कि जन औषधि केंद्रों की दवाएं ब्रांडेड दवाओं के समान ही गुणवत्ता वाली होती हैं। उन्होंने बताया कि अध्ययन में पाया गया कि अल्प्राजोलम,सेटिरिज़िन, सिप्रोफ्लोक्सासिन और फ्लुओक्सिटाइन जैसी दवाएं जन औषधि केंद्रों से ली गई थीं,उनकी गुणवत्ता ब्रांडेड दवाओं के समान थी। जन औषधि केंद्रों की दवाइयों की गुणवत्ता को लेकर कहा कि जन औषधि केंद्रों के लिए दवाएं WHO-GMP प्रमाणित आपूर्तिकर्ताओं से खरीदी जाती हैं। दवाओं का परीक्षण NABL प्रयोगशालाओं में किया जाता है।
जन औषधि केंद्रों की दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50-90% सस्ती होती हैं और गुणवत्ता में समान होती हैं।इसके अलावा बैठक के अन्त में अपर जिलाधिकारी द्वारा अभिहित अधिकारी को निर्देशित किया गया कि आगामी त्यौहार होली के दृष्टिगत जनपद में स्थित मिष्ठान प्रतिष्ठानों/खाद एवं पेय पदार्थ के प्रतिष्ठानों/रेस्टोरेंटों ल/होटल आदि का निरंतर सघन जांच कराई जाए तथा खुले स्थानों चट्टी चौराहों पर पनीर आदि का बिक्री रोकने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संतोष उपाध्याय,समस्त खाद्य सुरक्षा अधिकारी सहित स्वैच्छिक संगठनों के सदस्य उपस्थित रहे।