कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।अम्बेडकरनगर जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग एक बार फिर ‘सख्त कार्रवाई’ का बिगुल फूंक चुका है। बिना मान्यता के चल रहे विद्यालयों और मान्यता से ज्यादा कक्षाएं चला रहे स्कूलों को निशाना बनाते हुए बीएसए डॉ. पूनम मिश्रा ने सभी बीईओ को निरीक्षण के आदेश दे दिए हैं। विभाग का दावा है—नियम तोड़ने वालों पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा, अवैध कक्षाएं तुरंत बंद कराई जाएंगी और लापरवाह अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय होगी।लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और कहती है। यह कोई नई खबर नहीं है। हर साल लगभग यही अभियान चलाया जाता है। निरीक्षण के आदेश निकलते हैं, नोटिस बांटे जाते हैं, मीडिया में ‘सख्ती’ की सुर्खियां छपती हैं… और फिर सब कुछ शांत। झुनझुना बजाकर काम चला लिया जाता है। साल भर अवैध स्कूल अपनी मर्जी से चलते रहते हैं, बच्चे पढ़ते रहते हैं और जब ‘अभियान’ का मौसम आता है तो विभाग फिर से सक्रिय हो जाता है।इस बार भी वही स्क्रिप्ट दोहराई जा रही है। अधिकारियों को निर्देश है कि कोई भी स्कूल बिना मान्यता के न चले और मान्यता से ऊपर की कक्षाएं न खोलें। जांच में पकड़े गए स्कूलों को नोटिस मिलेगा, अवैध कक्षाएं बंद करवाई जाएंगी और बार-बार उल्लंघन करने पर एक लाख तक जुर्माने का प्रस्ताव बीएसए कार्यालय भेजा जाएगा। साथ ही निरीक्षण में ढिलाई बरतने वाले बीईओ के खिलाफ भी कार्रवाई की बात कही गई है।पर सवाल यह है—क्या यह सिर्फ कागजी कार्रवाई है? कहीं न कहीं विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता का आभास भी होता है। वरना साल-दर-साल वही अवैध स्कूल कैसे फलते-फूलते रहते हैं? अगर वाकई सख्ती होती तो एक-दो अभियान में ही स्थिति साफ हो जाती। लेकिन हर साल ‘चिह्नित करने’ और ‘नोटिस देने’ का चक्र दोहराया जाता है, जबकि असल में ज्यादातर मामलों में सब कुछ पुराना ढर्रा ही चलता रहता है।शिक्षा की गुणवत्ता और नियमों के पालन की बात तो अच्छी लगती है, लेकिन जब यह अभियान सालाना रस्म बनकर रह जाए और अधिकारियों की मिलीभगत का शक बना रहे, तो विश्वास कैसे बने? अब देखना यह है कि इस बार विभाग सिर्फ शोर मचाने तक सीमित रहेगा या वाकई कोई ठोस कार्रवाई नजर आएगी। फिलहाल तो पुराना नाटक फिर से शुरू हो चुका है—मंच तैयार है, संवाद वही हैं और दर्शक इंतजार कर रहे हैं कि आखिरकार पर्दा कब गिरेगा।
शिक्षा विभाग का ‘सालाना तमाशा’ शुरू: बिना मान्यता वाले स्कूलों पर सख्ती का शोर, असलियत में फिर वही झुनझुना?
अगस्त 12, 2026
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