देवल, ब्यूरो चीफ,सोनभद्र। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित भूजल सप्ताह के अंतर्गत 'घटता भूजल स्तर कारण एवं निवारण' विषय पर आधारित तीन दिवसीय विशेष कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ सोमवार को हुआ। गुरु नानक बालिका इंटर कॉलेज के प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम का संयोजन उत्तर प्रदेश के संस्कृति विभाग, क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई वाराणसी और क्षेत्रीय अभिलेखागार वाराणसी के संयुक्त तत्वाधान में किया गया है। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया। इसके बाद पुरातत्व विभाग के आलोक रंजन ने कार्यक्रम के अध्यक्ष आईएचडब्ल्यू उ.प्र. के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. कुसुमाकर श्रीवास्तव, मुख्य अतिथि इतिहासकार व विंध्य संस्कृति शोध समिति के संस्थापक-निदेशक दीपक कुमार केसरवानी, मुख्य वक्ता रवि प्रकाश चौबे विशिष्ट अतिथि अजीत कुमार सिंह, दिवाकर श्रीवास्तव कॉलेज के प्रबंधक जसवीर सिंह, आकाशवाणी केंद्र ओबरा के सौरभ तिवारी को माल्यार्पण व अंगवस्त्रम प्रदान कर सम्मानित किया। इसके पश्चात सभी अतिथियों एवं छात्राओं द्वारा पुरातात्विक धरोहरों पर आधारित लगाई गई विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दीपक कुमार केसरवानी ने सोनभद्र की जीवनदायिनी नदियों और पर्यावरण के संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि बेलन, घघर और कर्मनाशा इस क्षेत्र की प्रमुख नदियां हैं, जिन पर बने बांध सोनभद्र ही नहीं बल्कि आसपास के विस्तृत भू-भाग को सिंचित करते हैं। लेकिन जिस प्राकृतिक परिवेश से यह जल निकलता है, जहां प्राचीन पेड़, गुफाएं, भित्ति चित्र और ऐतिहासिक धरोहरें मौजूद हैं, सोनभद्र की जल जंगल जमीन का संरक्षण संवर्धन पर्यटन विकास जनहित में आवश्यक है, भूजल के गिरते हुए स्तर की निवारण के लिए हमें अधिक से अधिक संख्या में अपने घर आंगन खेत खलियान में वृक्षारोपण करना चाहिए ताकि यह वृक्ष बड़े होकर मानसून को रोके और बरसात हो।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता रविप्रकाश चौबे ने दैनिक जीवन में पानी की बचत और व्यक्तिगत प्रयासों पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि बड़े उद्योगों के अलावा जल संरक्षण की शुरुआत हर घर से होनी चाहिए। उन्होंने रॉबर्ट्सगंज और सोनभद्र की धरती को बचाने की अपील करते हुए कहा कि सुबह ब्रश करते समय बेवजह नल खुला न छोड़ें और जल की एक-एक बूंद का सदुपयोग करें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. कुसुमाकर श्रीवास्तव ने पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने की जरूरत की बात की।
इस अवसर पर रूपेश कुमार झा, आशुतोष कुमार, दिनेश कुमार, हरि भजन सिंह, किरण सिंह, अनुपमा सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
