देवल, ब्यूरो चीफ,म्योरपुर, सोनभद्र। खनिज संपदा के लिए देशभर में पहचान रखने वाले सोनभद्र की धरती में एक और महत्वपूर्ण खनिज एंडालुसाइट के बड़े भंडार होने के संकेत मिले हैं। बीएचयू के वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक प्रो. वैभव श्रीवास्तव द्वारा किए गए स्थलीय अध्ययन में दावा किया गया है कि यह खनिज रेणुकूट रेलवे स्टेशन से रनटोला, जमतिहवा नाला, रजखड़ होते हुए दुद्धी के उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र तक फैला हुआ है।
प्रो. श्रीवास्तव के अनुसार यह क्षेत्र लगभग 180 करोड़ वर्ष पुरानी चट्टानों से निर्मित है, जहां एंडालुसाइट खनिज की मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं। हालांकि कुछ स्थानों पर इस खनिज की गुणवत्ता में कमी भी देखी गई है। उन्होंने बताया कि यह खनिज स्पार्क प्लग सहित उच्च ताप सहन करने वाले औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में उपयोगी माना जाता है। भू-वैज्ञानिक का कहना है कि लगभग 20 किलोमीटर लंबे पहाड़ी क्षेत्र में इस खनिज की संभावनाएं हैं। इसके अलावा किरवानी के उत्तरी हिस्से से लगे जंगलों में लौह अयस्क (आयरन ओर) के भंडार होने के भी संकेत मिले हैं। हालांकि इसकी वास्तविक मात्रा और गुणवत्ता का आकलन भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा विस्तृत सर्वेक्षण के बाद ही संभव हो सकेगा। प्रो. वैभव श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने लंबे समय तक क्षेत्र का स्थलीय अध्ययन किया, जिसके दौरान इन खनिजों की मौजूदगी सामने आई। उन्होंने यह भी कहा कि रेणुकूट से रनटोला के बीच सोन-नर्मदा साउथ फॉल्ट गुजरता है, जिसके बीच में सक्रिय भू-भ्रंश (फॉल्ट) क्षेत्र भी मौजूद है। ऐसे में यदि भविष्य में इस क्षेत्र में खनन कार्य किया जाता है तो भू-वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यधिक सावधानी बरतना आवश्यक होगा। उन्होंने कहा कि यदि वैज्ञानिक सर्वेक्षण और खनिज अन्वेषण को आगे बढ़ाया गया, तो भविष्य में यह क्षेत्र
औद्योगिक और आर्थिक दृष्टि से नई संभावनाओं का केंद्र बन सकता है। हालांकि फिलहाल यह निष्कर्ष उनके अध्ययन पर आधारित हैं और खनिज भंडार की आधिकारिक पष्टि विस्तत सर्वेक्षण के बाद ही हो सकेगी।
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