देवल संवाददाता, मऊ। "नवंबर 2021 में जब मुझे भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रभारी बनाया गया, तब शायद ही किसी ने सोचा था कि पश्चिम बंगाल जैसी जटिल राजनीतिक जमीन पर इतना बड़ा परिवर्तन संभव होगा। लेकिन आज, जब पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत दर्ज हो चुकी है, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि यह जीत सुनियोजित रणनीति, संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं के अदम्य साहस का परिणाम है।"
पश्चिम बंगाल, जिसने प्लासी का युद्ध और बंगाल विभाजन जैसे ऐतिहासिक मोड़ देखे हैं, आज एक नए राजनीतिक अध्याय का साक्षी बना है। यह वही भूमि है जिसने रवींद्रनाथ टैगोर, सुभाष चंद्र बोस और स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष दिए और आज उसी धरती ने परिवर्तन का मार्ग चुना है।
जब मैंने जिम्मेदारी संभाली, तब स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण थी। राज्य में ममता बनर्जी के नेतृत्व में एक ऐसा तंत्र काम कर रहा था, जहाँ प्रशासन के समानांतर एक “गुंडा व्यवस्था” खड़ी कर दी गई थी। कार्यकर्ता डरे हुए थे, जनता में गुस्सा था, लेकिन आवाज़ दबा दी जाती थी।
ऐसे समय में मेरी प्राथमिकता साफ थी डर को खत्म करना और संगठन को बूथ स्तर तक खड़ा करना। हमने चरणबद्ध तरीके से रणनीति बनाई।
पहला कार्यकर्ताओं में आत्मविश्वास पैदा करना।
दूसरा हर बूथ पर मजबूत टीम तैयार करना।
तीसरा जो लोग खुलकर सामने नहीं आ सकते थे, उन्हें पर्दे के पीछे रहकर काम करने के लिए प्रेरित करना, खासकर सोशल मीडिया के माध्यम से।
युवा मोर्चा के माध्यम से हमने आक्रामक आंदोलन खड़े किए, जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा और जनता के बीच एक स्पष्ट संदेश गया कि अब बदलाव अवश्यंभावी है। देशभर से आए प्रवासी कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बनाकर चुनाव प्रबंधन को एक नई दिशा दी गई।
मेरे लिए सबसे बड़ा मोड़ वह था, जब मैंने खुद जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ समय बिताया उनकी पीड़ा सुनी, उनके संघर्ष को समझा और उन्हें भरोसा दिलाया कि यह लड़ाई हम जीतेंगे। उसी भरोसे ने आज इस ऐतिहासिक परिणाम का रूप लिया है।
कोलकाता से लेकर गांव-गांव तक, हर जगह कार्यकर्ताओं ने जिस साहस के साथ मुकाबला किया, वह अभूतपूर्व है।
आज की यह जीत सिर्फ एक राजनीतिक दल की जीत नहीं है यह पश्चिम बंगाल की जनता की जीत है, यह उन कार्यकर्ताओं की जीत है जिन्होंने डर के माहौल को तोड़ा, और यह उस रणनीति की जीत है जिसे हमने पूरी प्रतिबद्धता के साथ जमीन पर उतारा।
अगर मेरी भूमिका की बात की जाए, तो मैंने सिर्फ एक काम किया संगठन को एक दिशा दी, कार्यकर्ताओं को जोड़ा, और यह सुनिश्चित किया कि हर स्तर पर लड़ाई मजबूती से लड़ी जाए।
पश्चिम बंगाल ने बदलाव चुन लिया है, और यह बदलाव अब एक नए युग की शुरुआत करेगा।
