कृष्ण, देवल ब्यूरो, अंबेडकर नगर ।स्वास्थ्य व्यवस्था की चौखट पर एक बार फिर सवालिया निशान लग गया है। जलालपुर बाजार के दो चर्चित अल्ट्रासाउंड सेंटर — अवध अल्ट्रासाउंड सेंटर और शुक्ला अल्ट्रासाउंड सेंटर — एक गंभीर लापरवाही के मामले में फंस गए हैं। पेट दर्द से तड़प रहे मरीज को दोनों केंद्रों ने 'सब कुछ नॉर्मल' बताकर घर भेज दिया, जबकि महज दो दिन बाद जिला अस्पताल में जांच कराई गई तो किडनी स्टोन निकला। मामला 7 मई का है। सत्यम नामक मरीज लगातार पेट के दर्द से परेशान था। सबसे पहले वह अवध अल्ट्रासाउंड सेंटर पहुंचा, जहां रिपोर्ट आई — सामान्य। दर्द न रुकने पर वह सीधे शुक्ला अल्ट्रासाउंड सेंटर पहुंचा, वहां भी यही रिपोर्ट मिली — कोई समस्या नहीं।
लेकिन 9 मई को जब मरीज जिला मुख्यालय पहुंचा और दोबारा अल्ट्रासाउंड कराया गया तो सच सामने आ गया। रिपोर्ट में साफ-साफ किडनी स्टोन लिखा था। मरीज और उसके परिजनों में गुस्सा फूट पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। जलालपुर के इन दोनों केंद्रों पर पहले भी कई बार गंभीर आरोप लग चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रों पर नाम जिन डॉक्टरों के चल रहे हैं, वे अक्सर मौके पर नजर नहीं आते। जांच का काम दूसरे लोग करते हैं। सबसे बड़ा आरोप यह है कि पंजीकृत महिला डॉक्टर अर्चना झा की जगह बिना डिग्री वाले पुरुष डॉक्टर अल्ट्रासाउंड कर रहे हैं। एक मरीज का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह साफ-साफ बता रहा है कि उसका अल्ट्रासाउंड एक पुरुष ने किया था। यह घटना महिलाओं की प्राइवेसी और चिकित्सकीय नैतिकता दोनों पर सवाल उठाती है। अम्बेडकरनगर के स्वास्थ्य विभाग पर भी भारी दबाव बन रहा है। अगर विभाग ने इस बार भी आंखें मूंद लीं तो यह साबित हो जाएगा कि निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों में लापरवाही और अनियमितताएं खुलेआम चल रही हैं।
