लगातार चौथी चुनावी हार के बाद संकट में फंसी AIADMK ने जोरदार पलटवार किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सी.वी. शनमुगम और एस.पी. वेलुमणि द्वारा विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन को समर्थन देने की वकालत करने के बाद AIADMK की आईटी विंग ने X पर लंबे चौड़े पोस्ट के जरिए हमला बोला है।
बागियों पर 'दुम हिलाने' का आरोप
पार्टी की आईटी विंग ने बागी नेताओं पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि शनमुगम, वेलुमणि और एक अन्य नेता ने पिछले हफ्ते TVK से मंत्री पद के लिए 'भीख' मांगी थी।
पोस्ट में पूछा गया, 'DMK गठबंधन की अफवाहों को फैलाना ही आपकी ‘बड़ी योजना’ थी? अब मीडिया रिपोर्ट कर रहा है कि आप TVK के सामने गिड़गिड़ा रहे थे।
क्या आप यह भी स्वीकार करते हैं?'पार्टी ने बागी नेताओं को याद दिलाया कि वे AIADMK के टिकट और कार्यकर्ताओं के समर्थन से ही जीते थे। पोस्ट में सवाल किया गया कि आखिर वे कौन होते हैं जो पार्टी के गठबंधन तय करें।
जयललिता युग से लेकर EPS के संकट तक
AIADMK ने 2006 से 2021 तक तमिलनाडु की राजनीति पर दबदबा बनाए रखा था। पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के निधन (2016) के बाद पार्टी का प्रभाव घटा। 2016 में सहानुभूति लहर पर जीत मिली, लेकिन उसके बाद 2019, 2021 और 2024 के चुनाव DMK के हाथों हारे गए।
पिछले महीने की चौथी हार ने पार्टी प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) के नेतृत्व और अस्तित्व को नई चुनौती दी है। शनमुगम ने इन हारों को पार्टी को फिर खड़ा करने का मौका बताया और DMK के साथ गठबंधन की अफवाहों का जिक्र किया।
'DMK विरोध पर टिकी है हमारी पहचान
शनमुगम ने कहा, 'हमने पार्टी DMK के विरोध में बनाई थी। 53 साल तक हमारी राजनीति इसी पर आधारित रही। DMK समर्थन से सरकार बनाने का प्रस्ताव पहले भी खारिज हो चुका है।
ऐसा गठबंधन AIADMK का अस्तित्व खत्म कर देगा।' उन्होंने जोर दिया कि उनका पार्टी तोड़ने का कोई इरादा नहीं है। AIADMK में जारी यह आंतरिक कलह तमिलनाडु की राजनीति को नया मोड़ दे सकती है।
