मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का असर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भी दिखने लगा है। यूएई का सब्र अब जवाब देने लगा है। उसने इस युद्ध के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया है।
UAE ने चेतावनी दी है कि अगर युद्ध के चलते अमेरिकी डॉलर की कमी हुई तो वह तेल और गैस के लिए चीनी करेंसी युआन (Yuan) या दूसरी करेंसी में व्यापार शुरू कर देगा।
यूएई ने अमेरिका को दी चेतावनी
UAE सेंट्रल बैंक के गवर्नर खालिद मोहम्मद बालामा ने पिछले हफ्ते वॉशिंगटन में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट और फेडरल रिजर्व अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें उन्होंने डॉलर स्वैप लाइन की व्यवस्था करने की बात उठाई।
अमीराती अधिकारियों ने साफ कहा कि ईरान युद्ध ने पूरे मिडिल ईस्ट को आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। इस युद्ध ने UAE की अर्थव्यवस्था को खतरे में डाल दिया है। विदेशी निवेशक डर रहे हैं और पूंजी पलायन का खतरा बढ़ गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, UAE ने अब तक युद्ध के सबसे बुरे आर्थिक प्रभावों से बचने में कामयाबी हासिल की है, लेकिन आने वाले समय में डॉलर की कमी पड़ने पर वह युआन जैसी अन्य मुद्राओं की ओर रुख कर सकता है।
UAE का दिरहम अभी भी अमेरिकी डॉलर से पेग्ड है और इसके पास 270 बिलियन डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार हैं। फिर भी लंबे समय तक तेल निर्यात प्रभावित रहने और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने से गंभीर जोखिम पैदा हो सकता है।
UAE की अर्थव्यवस्था पर खतरा
ईरान ने इजरायल के साथ युद्ध बढ़ने पर UAE समेत खाड़ी देशों पर 2800 से ज्यादा ड्रोन और मिसाइलें दागीं, जिनमें से ज्यादातर को रोक लिया गया। इस स्थिति ने UAE को अमेरिका के और करीब ला दिया है।
पहले UAE ईरान के साथ राजनयिक और वित्तीय संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा था ताकि क्षेत्रीय अस्थिरता से बचा जा सके।
अमेरिकी ट्रेजरी अधिकारियों ने हाल ही में IMF-विश्व बैंक बैठक के दौरान खाड़ी देशों को बुलाकर बुनियादी ढांचे और रिकवरी की चर्चा की। सऊदी वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जादान ने चेतावनी दी कि युद्ध के बाद सामान्य तेल लॉजिस्टिक्स बहाल होने में जून के अंत तक समय लग सकता है।
S&P ग्लोबल ने कहा कि UAE के मजबूत वित्तीय बफर संकट को झेलने में मदद करेंगे, लेकिन लंबा संकट तेल निर्यात और अर्थव्यवस्था दोनों को प्रभावित कर सकता है। UAE और बहरीन ने हाल में अरबों डॉलर का कर्ज उठाया है ताकि लिक्विडिटी बनी रहे।
