देवल संवादाता,गाजीपुर।प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने जिले के मरदह थाना क्षेत्र के हरहरी गांव निवासी और वाराणसी केंद्रीय कारागार में उम्रकैद की सजा काट रहे बंदी अंजनी सिंह की समय पूर्व रिहाई की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। राज्यपाल ने बंदी द्वारा प्रस्तुत दया याचिका को विभिन्न प्रशासनिक एवं सुरक्षा कारणों के दृष्टिगत खारिज कर दिया है।
क्या है पूरा मामला
बीते 13 अप्रैल को शासन के उपसचिव कमलेश कुमार की ओर से जारी पत्र के अनुसार, जनपद के मरदह थाना क्षेत्र स्थित ग्राम हरहरी निवासी अंजनी सिंह ने 29 मई 2006 को मामूली कहा-सुनी के बाद कांता सिंह, रामजी सिंह,लक्ष्मण सिंह व संजय सिंह के साथ मिलकर लालता सिंह की लाइसेंसी बंदूक से गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में गाजीपुर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 20 अक्टूबर 2010 को अंजनी सिंह और कांता सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जबकि रामजी सिंह, लक्ष्मण सिंह को हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया था। वहीं, घटना के समय संजय सिंह के नाबालिग होने के कारण गाजीपुर के जुवेनाइल कोर्ट ने बरी कर दिया था। उधर, सजा के दौरान जेल में ही कांता सिंह की मौत हो गई थी, जबकि अंजनी सिंह ने राज्यपाल के समक्ष दया याचिका प्रस्तुत की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी थी सजा
इस मामले में कानूनी दांव-पेंच का लंबा दौर चला। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिसंबर 2016 में अपील पर सुनवाई करते हुए उसे दोषमुक्त कर दिया था। हालांकि, बाद में मामला उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) पहुंचा, जहां 31 अगस्त 2017 को शीर्ष अदालत ने सत्र न्यायालय द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को यथावत रखने का आदेश जारी किया।
पुलिस और डीएम की रिपोर्ट बनी बाधा
बंदी की समय पूर्व रिहाई के मामले में जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक गाजीपुर की रिपोर्ट अहम रही। स्थानीय प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि बंदी के बाहर आने से भविष्य में दोबारा अपराध की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही स्थानीय थाने ने भी उसकी रिहाई का कड़ा विरोध किया था।
दया याचिका समिति का फैसला
दया याचिका समिति ने पाया कि 21 मार्च 2024 तक बंदी ने बिना पैरोल (अपरिहार) 12 वर्ष 11 माह से अधिक की सजा काटी है। समिति का मानना था कि इतनी कम सजा पर रिहाई से समाज में गलत संदेश जाएगा। इन्हीं तथ्यों पर विचार करने के बाद राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने संविधान के अनुच्छेद-161 के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए दया याचिका को अस्वीकार कर दिया है।
क्या बोले अधिकारी
इस संबंध में शासन की ओर से प्राप्त पत्र के आलोक में आवश्यक औपचारिक कार्रवाई की जा रही है।
