देवल, ब्यूरो चीफ,ओबरा, सोनभद्र। प्रदेश सरकार के हरित अभियान के दावों के बीच जनपद सोनभद्र के ओबरा क्षेत्र से वृक्षारोपण में भारी अनियमितताओं का मामला सामने आया है। रेणुका नदी तट स्थित पारसोई-4 वृक्षारोपण स्थल पर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कागजों में बड़े स्तर पर वृक्षारोपण दिखाकर लाखों रुपए के बजट में गड़बड़ी की गई है। चर्चा है कि यदि इस पूरे प्रकरण की किसी स्वतंत्र एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच करा दी जाए तो एक बड़ा भ्रष्टाचार उजागर हो सकता है।
भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि रेणुका नदी तट स्थित पारसोई-4 वृक्षारोपण स्थल पर लगाए गए सूचना पट्ट में 6112 'बोना नाली' (गड्डों) के पौधरोपण का दावा किया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। मौके पर अधिकांश गड्ढे खाली हैं, जबकि जहां पौधे लगाए गए हैं वहां भी वैज्ञानिक मानकों की अनदेखी किए जाने का दावा किया जा रहा है। नियमानुसार पौधों के बीच लगभग 5 मीटर की दूरी रखी जानी चाहिए, लेकिन यहां एक मीटर के भीतर 25 से 30 पौधे रोप दिए गए हैं, जिससे उनके जीवित रहने की संभावना बेहद कम हो गई है। लोगों का कहना है कि अत्यधिक सघन रोपण पौधों के विकास में बाधा डालता है और यह उनकी 'हत्या' के समान है। ग्रामीणों का आरोप है कि 15.28 हेक्टेयर क्षेत्र में वास्तविक कार्य करने के बजाय एक ही स्थान पर पौधे लगाकर लक्ष्य पूरा दिखा दिया गया है, जिससे मजदूरी और संसाधनों में बचत कर सरकारी धन निकाला जा सके।
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