देवल संवाददाता, गाजीपुर। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज, अयोध्या के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्र आंकुशपुर, गाजीपुर-II के वैज्ञानिकों द्वारा ग्राम अंIकुशपुर, ब्लॉक करण्डा के किसानों के लिए ‘उर्वरकों का संतुलित प्रयोग विषय पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। आज के कार्यक्रम में कृषक महिलाओं को सुगमता पूर्वक उपलब्ध संसाधनों के समुचित प्रयोग से जैविक खाद तैयार कर रासायनिक खादों पर निर्भरता को कम किया जा सके पर तकनिकी जानकारी दिया गया। केंद्र के डॉ0 पंकज कुमार (वैज्ञानिक कृषि अभियांत्रिकी ) ने किसानों को बताया कि ढैचा एक तेजी से बढ़ने वाली हरी खाद के रूप प्रयोग होने वाली प्रमुख फसल है, इसे “मिट्टी सुधारक फसल” भी कहा जाता है। यह 40-45 दिन में ही यह 3-4 फीट तक बढ़ जाती है और पलटायी के बाद सड़ने के उपरांत खेतों में मिट्टी के भौतिक ,रासायनिक एवं जैविक गुण को सुधारने में सक्षम होती हैं। डॉ० नरेंद्र प्रताप (वैज्ञानिक पादप प्रजनन), ने किसानों को अवगत कराया कि मिट्टी में जीवांश कार्बन ही उपजाऊ खेत की असली पूंजी हैं। मिट्टी में जीवांश कार्बन को आप खेत का “बचत खाता” समझिए। पर्याप्त जीवांश युक्त मिट्टी दिखने में काली अथवा भूरी रंग की दिखायी देती है, और यही मात्रा मिट्टी एवं फसल की सेहत, नमी संरक्षण और अधिक उपज तय करता है। भारत की 70% मिट्टी में जीवांश 0.5% से कम है, जबकि अच्छी उपज के लिएयह मात्रा 0.75 – 1% जरूरी है‚ इसलिए किसानों से आग्रह भी किया कि प्रत्येक किसान अपने परिवार के स्वास्थ्य हेतु अपने भूमि के छोटे से भाग पर मानव एवं पर्यावरण सुरक्षा हेतु जैविक खेती करें। डॉ0 दीपक प्रजापति (मृदा वैज्ञानिक), ने कम्पोस्ट,केंचुआ खाद ,हरी खाद,भूरी खाद,गोबर की खाद ,जीवामृत , बीजामृत ,घनजीवामृत, वास्पा एवं आच्छादन‚ बीज शोधन आदि घटक पर किसानों को विस्तार से बताया I इस जागरूकता कार्यक्रम में मालती देवी ‚ मुटुरनि देवी‚ गुंजा जबिता आदि कृषक महिलाओं ने प्रतिभाग किया।
कृषि विज्ञान केंद्र आंकुशपुर गाजीपुर- कृषक महिलाओं को संतुलित उर्वरकों के प्रयोग हेतु किया गया जागरूक
अप्रैल 28, 2026
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