आमिर, देवल ब्यूरो ,जौनपुर। विकासखंड मुंगराबादशाहपुर के प्राथमिक विद्यालय रामपुर गजाधर में शुक्रवार को वार्षिकोत्सव, प्रवेशोत्सव, सांस्कृतिक मंच उद्घाटन एवं सेवानिवृत्त शिक्षक सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, संस्कृति और सम्मान का अद्भुत समन्वय देखने को मिला, जिसने उपस्थित लोगों को गहराई से प्रभावित किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. गोरखनाथ पटेल द्वारा माँ सरस्वती एवं भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं विशिष्ट अतिथियों को अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया।
समारोह में गिरिजा शंकर इंटर कॉलेज नीभापुर के प्रवक्ता जयकिशन यादव तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय बड़ागांव के अनुचर राम सिंह को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। उनके योगदान की सराहना करते हुए उपस्थित जनों ने तालियों की गूंज से उनका स्वागत किया।
अपने संबोधन में बीएसए डॉ. गोरखनाथ पटेल ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि 6 से 14 वर्ष तक का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों को निर्देशित किया कि सभी बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करें और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करें। साथ ही उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन और विचारों पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को उनसे प्रेरणा लेने का संदेश दिया।
खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. अविनाश सिंह ने भी शिक्षकों से अपील की कि वे हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं और नामांकन अभियान को सफल बनाएं।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से सभी का मन मोह लिया। लोक नृत्य, गीत-संगीत और अन्य प्रस्तुतियों ने समारोह में उत्साह और उल्लास का वातावरण बना दिया।
कार्यक्रम का संचालन एआरपी पुष्कर मिश्र ने प्रभावी ढंग से किया। इस अवसर पर क्षेत्र के शिक्षक-शिक्षिकाएं, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। पूर्व ब्लॉक प्रमुख शिव मूरत पटेल, विंध्यवासिनी उपाध्याय, छोटेलाल मौर्य और ब्लॉक अध्यक्ष संजय कुमार मिश्र सहित कई प्रमुख लोग समारोह का हिस्सा बने।
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर बीएसए ने विद्यालय के प्रधानाध्यापक अजीत पटेल एवं समस्त स्टाफ की सराहना करते हुए उनके प्रयासों को सराहनीय बताया। यह आयोजन न केवल शिक्षा के महत्व को रेखांकित करने वाला रहा, बल्कि सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करने का सशक्त माध्यम बना।
