देवल संवाददाता, मऊ। जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र की अध्यक्षता में 'भारत रत्न' बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती कलेक्ट्रेट सभागार में मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी एवं मुख्य राजस्व अधिकारी दिनेश द्वारा बाबा साहब के चित्र पर माल्यार्पण,पुष्पांजलि अर्पित तथा दीप प्रज्वलित कर किया गया।कलेक्ट्रेट सभागार में उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र ने बाबा साहब के महान व्यक्तित्व और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाबा साहब केवल एक संविधान निर्माता ही नहीं,बल्कि एक महान समाज सुधारक और युगदृष्टा थे,जिन्होंने सदियों से शोषित समाज को आत्मसम्मान के साथ जीने का मार्ग दिखाया।
जिलाधिकारी ने बाबा साहब के मूल मंत्र "शिक्षित बनो,संगठित रहो और संघर्ष करो" को उद्धृत करते हुए कहा कि शिक्षा ही वह सशक्त माध्यम है जिससे समाज के अंतिम व्यक्ति का सर्वांगीण विकास संभव है। उन्होंने सभी अधिकारियों को याद दिलाया कि भारतीय संविधान देश की एकता और अखंडता का सबसे बड़ा रक्षक है और हमें इसके मूल्यों को अपने कार्य व्यवहार में उतारना चाहिए। उन्होंने बताया कि डॉ. भीमराव आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891, महू मध्य प्रदेश उनका पूरा नाम भीमराव रामजी आंबेडकर तथा माता-पिता भीमाबाई माता और रामजी मालोजी सकपाल पिता ब्रिटिश सेना में सूबेदार थे।उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट प्राप्त किया। स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री और संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। उनकी मृत्यु 06 दिसंबर 1956, नई दिल्ली में हुई।इसके अलावा जिलाधिकारी ने बताया कि भारत के संविधान के जनक के रूप में,उन्होंने समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के सिद्धांतों को स्थापित किया। 'बहिष्कृत हितकारिणी सभा' के माध्यम से दलितों,महिलाओं और मजदूरों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। उन्होंने बताया कि शिक्षित बनो, संगठित रहो,संघर्ष करो यह उनका प्रसिद्ध नारा था,जो दलितों को सशक्त बनाने का आधार बना। बाबा साहब ने हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं को संपत्ति और तलाक के समान अधिकार देने की वकालत की। डॉ.आंबेडकर को 1990 में मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य राजस्व अधिकारी दिनेश ने बहुत ही विद्वत्तापूर्ण ढंग से बाबा साहब के जीवन के विविध आयामों को साझा किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बाबा साहब का ज्ञान अतुलनीय था। वे एक प्रखर विधिवेत्ता होने के साथ-साथ महान अर्थशास्त्री भी थे। भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना में उनके शोध और विचारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्होंने बताया कि बाबा साहब ने हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं को कानूनी अधिकार और समाज में बराबरी का दर्जा दिलाने की जो नींव रखी,वह आज के आधुनिक भारत का आधार है।
उन्होंने उपस्थित राजस्व और प्रशासनिक कर्मियों को प्रेरित करते हुए कहा कि पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाना और वंचितों की सेवा करना ही बाबा साहब के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
अपर उप जिलाधिकारी एवं जिला समाज कल्याण अधिकारी अनुज कुमार ने संगोष्ठी के दौरान बाबा साहब के तीन मुख्य सिद्धांतो स्वतंत्रता,समानता और बंधुत्व पर चर्चा की गई। बाबा साहब ने श्रमिकों के लिए कार्य घंटों को निर्धारित करने और उनके हितों की रक्षा के लिए अनेक कानून बनाए।
उन्होंने जल प्रबंधन, सिंचाई नीतियों और बिजली ग्रिड जैसे महत्वपूर्ण ढांचागत विकास में देश को नई दिशा दी। बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक नागरिक को मतदान का समान अधिकार दिलाकर उन्होंने लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत किया।कार्यक्रम के अंत में जिलाधिकारी ने समस्त अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिया कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ पहुँचाया जाए।संगोष्ठी का संचालन बलवंत पाण्डेय द्वारा किया गया।इस अवसर पर अपर उप जिलाधिकारी दीपक,राजमणि सिंह,संजीव प्रभाकर नाजिर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण एवं कलेक्ट्रेट परिवार के समस्त कर्मचारी उपस्थित रहे।
