आमिर, देवल ब्यूरो ,जौनपुर। जनपद जौनपुर के जाफराबाद विधानसभा क्षेत्र के निवासी अखिल भारतीय हिंदू सेवा दल, उत्तर प्रदेश के प्रदेश संगठन मंत्री एवं प्रमुख समाजसेवी अतुल कुमार तिवारी (बुद्धिमान) ने यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए नियमों को 'काला कानून' करार देते हुए इसके खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक इस भेदभावपूर्ण कानून को वापस नहीं लिया जाता या इसमें उचित संशोधन नहीं होता, तब तक उनका संघर्ष थमेगा नहीं।
'जातिवाद' को हटाकर 'छात्रवाद' की मांग – समाजसेवी अतुल तिवारी ने जोर देकर कहा कि शिक्षा के मंदिर में जाति के आधार पर बंटवारा स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने मांग की कि यूजीसी को 'जातिवाद' की जगह 'छात्रवाद' को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा, "शिकायत करने का अधिकार हर छात्र को समान रूप से मिलना चाहिए, चाहे वह ओबीसी, एससी, एसटी या सामान्य वर्ग से हो। यदि किसी भी छात्र के साथ समस्या होती है, तो उसे यूजीसी कमेटी के समक्ष अपनी बात रखने का हक होना चाहिए। न्याय की देवी की आंखों पर पट्टी इसीलिए होती है कि वह जाति नहीं, सत्य देखे।"
झूठी शिकायतों पर लगे लगाम– समाजसेवी अतुल ने कानून के दुरुपयोग की संभावना पर भी चिंता जताई। उन्होंने मांग की कि इस कानून में 'झूठी शिकायत' करने वालों के खिलाफ भी सख्त दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए, ताकि किसी निर्दोष को प्रताड़ित न किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इन संशोधनों के साथ सरकार आगे बढ़ती है, तभी छात्र संगठन इसका समर्थन करेंगे, अन्यथा आंदोलन और उग्र होगा।
अराजक तत्वों और बदसलूकी करने वालों को चेतावनी– मीडिया बाइट के दौरान अतुल कुमार तिवारी ने उन अराजक तत्वों को कड़ी फटकार लगाई, जो यूजीसी के नाम पर समाज में नफरत फैला रहे हैं। उन्होंने महिला पत्रकार रुचि तिवारी के साथ हुए अभद्र और शर्मनाक व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा की।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग – अतुल तिवारी ने दो टूक शब्दों में कहा, "पत्रकारों के साथ बदतमीजी करने वाले और जाति विशेष के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने वाले 'अनपढ़ और जाहिल' लोग अपनी मर्यादा न भूलें। मैं जिला प्रशासन से मांग करता हूं कि ऐसे अराजक तत्वों को चिन्हित कर तत्काल जेल भेजा जाए। यदि प्रशासन मौन रहा और हमें मजबूर होना पड़ा, तो हम इन्हीं की भाषा में जवाब देना जानते हैं।