लोकसभा ने ट्रांसजेंडर की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े संशोधन विधेयक को मंगलवार को ध्वनिमत से पारित कर दिया।
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने विधेयक पर हुई चर्चा पर जवाब देते हुए कहा कि विधेयक का उद्देश्य उन लोगों को सुरक्षा देना है, जिन्हें बायोलाजिकल समस्याओं की वजह से बायकाट का सामना करना पड़ता है। इस बदलाव से यह पक्का होगा कि ट्रांसजेंडरों को कानूनी पहचान और सुरक्षा दोनों ही मिलती रहेगी।
ट्रांसजेंडर के अधिकारों के संरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयक-2026 पर विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस विधेयक से ट्रांसजेंडर के अधिकारों को प्रभावित करने वाले लोगों को अब अधिकतम 14 साल की जेल की सजा प्रविधान किया गया है। जबकि, 2019 के कानून में ऐसे मामलों में अधिकतम दो साल की सजा का प्रावधान किया गया था। इस दौरान संशोधन विधेयक का विपक्ष ने विरोध किया।
संसद की स्थाई समिति के पास भेजने की मांग
साथ ही संसद की स्थाई समिति के पास भेजने की मांग की। विपक्ष का कहना था कि सरकार इस विधेयक के जरिये ट्रांसजेंडर को स्वयं की पहचान तय करने के दिए गए अधिकार को छीन रही है। विपक्ष ने इस विधेयक को प्रवर समिति को भेजने की मांग की है। गौरतलब है कि राज्यसभा से इस विधेयक के पारित होने के बाद यह कानूनी रूप ले लेगा।
ये होंगे प्रमुख बदलाव-विधेयक 'ट्रांसजेंडर' शब्द की परिभाषा को संशोधित करता है। इसमें अब जैविक या शारीरिक लक्षणों या विशिष्ट सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान (जैसे किन्नर, हिजड़ा) वाले व्यक्तियों को ही शामिल करने का प्रस्ताव है।-इस विधेयक के जरिये ट्रांसजेंडर की स्वयं पहचान तय करने के दिए गए अधिकार को सीमित कर दिया गया है।
अब ट्रांसजेंडर के रूप में मान्यता प्राप्त कतने के लिए उन्हें मेडिकल बोर्ड से प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होगा।-ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के खिलाफ अपराधों पर उसकी गंभीरता के आधार पर अधिकतम 14 साल की सजा का प्रविधान किया गया है।
राहुल गांधी ने ट्रांसजेंडर विधेयक को खतरनाक और संवैधानिक अधिकारों पर बताया
कांग्रेस ने ट्रांसजेंडर के अधिकारों से जुड़े 'ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक 2026' को खतरनाक तथा संवैधानिक अधिकारों पर हमला बताते हुए संसद के बाहर ही नहीं भीतर भी इसका विरोध किया।
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने इस विधेयक के जरिये भाजपा नेतृत्व वाली सरकार पर अपने संकीर्ण विचारों को आगे बढ़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ट्रांसजेंडर समुदायों का सम्मान करने के देश के समृद्ध इतिहास को नष्ट कर रही है।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक स्पष्ट रूप से ट्रांसजेंडर वर्ग के संवैधानिक अधिकारों और पहचान पर एक खुला हमला है। लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा से पहले मंगलवार को ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रतिनिधियों से संसद भवन में मुलाकात के बाद नेता विपक्ष ने एक्स पर बयान जारी कर इसका विरोध किया।
ट्रांसजेंडर प्रतिनिधियों संग हुई इस बातचीत के दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद थीं।
राहुल गांधी ने कहा कि यह विधेयक ट्रांसजेंडरों से अपनी पहचान स्वयं तय करने की क्षमता और अधिकार छीन रहा है जो सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का भी उल्लंघन है।
यह विधेयक ट्रांसजेंडर वर्ग को मेडिकल बोर्ड द्वारा अमानवीय जांच से गुजरने के लिए मजबूर ही नहीं करता, बल्कि बिना किसी सुरक्षा उपाय के आपराधिक दंड और निगरानी लागू करता है।
