देवल संवाददाता। आज़मगढ़ विश्वविद्यालय के समीपवर्ती ग्रामीण क्षेत्र आज़मबंध में आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर के अंतर्गत निकाली गई जन-जागरूकता रैली ने पूरे क्षेत्र में सामाजिक चेतना की नई लहर पैदा कर दी। यह रैली केवल औपचारिकता न रहकर ग्रामीण विकास, स्वच्छता और सामूहिक जिम्मेदारी की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में सामने आई।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल शिविर स्थल—विश्वविद्यालय परिसर स्थित मंदिर—से हुई, जहाँ स्वयंसेवकों ने अनुशासित पंक्तियों में राष्ट्रगान और लक्ष्य गीत के साथ दिन का संकल्प लिया। इसके बाद रंग-बिरंगी तख्तियों और प्रेरक नारों के साथ रैली आज़मबंध ग्राम के मुख्य मार्ग से होती हुई गलियों, टोलों और मजरों तक पहुँची।
रैली के दौरान ‘स्वच्छ भारत, समृद्ध भारत’ और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। स्वयंसेवकों के उत्साह को देखकर ग्रामीण—बच्चे, बुजुर्ग और युवा—स्वतः ही इस अभियान से जुड़ते चले गए।
इस अभियान की विशेषता यह रही कि स्वयंसेवकों ने केवल जागरूकता तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर कार्य भी किया। सार्वजनिक स्थलों, कुओं के आसपास और विद्यालय परिसर में साफ-सफाई कर उन्होंने स्वच्छता का व्यावहारिक संदेश दिया। ग्रामीणों को सूखे-गीले कचरे के पृथक्करण, जलभराव की समस्या और उससे होने वाली बीमारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी रैली में विशेष जोर दिया गया। ‘एक पेड़, एक जीवन’ का संदेश देते हुए स्वयंसेवकों ने नीम, पीपल और बरगद जैसे पारंपरिक वृक्षों के महत्व को रेखांकित किया। साथ ही जल संरक्षण के लिए सोखता गड्ढा निर्माण और वर्षा जल संचयन के उपायों पर भी चर्चा की गई।
रैली के दौरान सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी आवाज बुलंद की गई। स्वयंसेवकों ने घर-घर जाकर शिक्षा के महत्व, विशेषकर बालिका शिक्षा पर संवाद किया और स्कूल न जाने वाले बच्चों के अभिभावकों को जागरूक किया। नशामुक्ति अभियान के तहत नुक्कड़ नाटकों और गीतों के माध्यम से नशे के दुष्परिणामों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिससे कई युवाओं ने नशा छोड़ने का संकल्प लिया।
इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों को आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना और किसान सम्मान निधि जैसी सरकारी योजनाओं की जानकारी सरल भाषा में दी गई। डिजिटल साक्षरता पर बल देते हुए उन्हें बिचौलियों से बचकर सीधे लाभ लेने के तरीके भी बताए गए। महिला सशक्तिकरण के तहत स्वयं सहायता समूहों के गठन और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने की प्रेरणा दी गई।
रैली के समापन पर गाँव की चौपाल में एक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें ग्राम प्रधान एवं अन्य गणमान्य लोगों ने युवाओं के इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने इसे ग्रामीण परिवर्तन की दिशा में सकारात्मक संकेत बताया।
कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शशि प्रकाश शुक्ला, डॉ. हरेंद्र सिंह प्रजापति एवं डॉ. मनीषा सिंह के नेतृत्व में किया गया। आयोजकों ने बताया कि शिविर का उद्देश्य केवल श्रमदान नहीं, बल्कि स्वयंसेवकों में नेतृत्व क्षमता और सामाजिक संवेदनशीलता का विकास करना है।
अंत में सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से शपथ ली कि वे अपने गाँव को स्वच्छ, प्लास्टिक मुक्त बनाएंगे, जल संरक्षण को अपनाएंगे और बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करेंगे।
यह सात दिवसीय विशेष शिविर न केवल आज़मबंध की गलियों को स्वच्छ बनाने में सफल रहा, बल्कि ग्रामीणों की सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
