देवल संवाददाता, आजमगढ़। डिजिटल युग में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों और तकनीकी चुनौतियों के बीच महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय (एमएसडीयू), आजमगढ़ में साइबर सुरक्षा और डिजिटल जागरूकता को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल की गई। राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के तत्वावधान में आयोजित विशेष व्याख्यान ने छात्रों को न केवल तकनीकी रूप से जागरूक किया, बल्कि उन्हें जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित भी किया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान नवाचार-प्रधान दौर में तकनीक हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है, ऐसे में इसके सुरक्षित उपयोग की समझ अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा, “सावधानी ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है”, और छात्रों से डिजिटल साक्षरता को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में आरबीएस मैनेजमेंट एंड टेक्निकल कैंपस, आगरा के कंप्यूटर एप्लीकेशन विभाग के प्रो. किशन कुमार गोयल ने साइबर सुरक्षा के तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा माइनिंग के इस दौर में व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है। उन्होंने छात्रों को मजबूत पासवर्ड बनाने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) अपनाने, संदिग्ध लिंक से बचने और सोशल मीडिया पर सतर्क रहने जैसे व्यावहारिक उपाय सुझाए।
कार्यक्रम में साइबर अपराधों की वास्तविकता और कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी देने के लिए साइबर सेल प्रभारी उपनिरीक्षक रवि गौतम, मुख्य आरक्षी ओमप्रकाश जायसवाल और राहुल सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने वास्तविक केस स्टडी के माध्यम से बताया कि साइबर ठगी की स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करना जरूरी है। साथ ही, उन्होंने ‘1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर’ के उपयोग और समय पर शिकायत दर्ज कराने के महत्व पर जोर दिया।
विशेष वक्ता राहुल सिंह ने युवाओं को “डिजिटल एंबेसडर” बनने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि छात्र-छात्राएं स्वयं जागरूक होकर अपने परिवार और समाज, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाएं।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारियों डॉ. शशि प्रकाश शुक्ला, डॉ. हरेंद्र सिंह प्रजापति और डॉ. मनीषा सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीषा सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अंकुर चौबे ने प्रस्तुत किया।
अंततः यह व्याख्यान केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि छात्रों के लिए एक मार्गदर्शक पहल सिद्ध हुआ, जिसने उन्हें डिजिटल दुनिया में सुरक्षित, सजग और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित किया।
